मासूमियत, शरारत और प्रतिभा का मेल थी श्रीदेवी

जुबा न भी बोले पर आंखों से अपनी बात कह देना का हूनर था श्रीदेवी में। अब इस बात को सही या गलत साबित करने के लिए हमें श्रीदेवी को बीते कल में ही खोजना पड़ेगा। ये रुप की रानी 24 फरवरी को दुनिया छोड़कर हमारे बीच से चली गई हैं। पर उनकी फिल्मी विरासत आने वाली कई पीढ़ियों के लिए अभिनय की पाठशाला होगी, लोग उनसे अभिनय की बारीकियां सीखेंगे।

श्रीदेवी ऐसी अभिनेत्री हैं, जो मात्र 4 साल की उम्र से फिल्मों में काम कर रही थी। 50 साल के अपने फिल्मी करियर में श्रीदेवी ने 300 से अधिक हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम किया था। 80 के दशक में अकसर फ़िल्मों में अभिनेत्रियां हीरो पर निर्भर रहती थीं, पर श्रीदेवी ऐसी अभिनेत्री थीं जिनके नाम पर दर्शक सिनेमाघरों में खिंचे चले आते थे। श्रीदेवी अपने अभिनय से महशूर अभिनेत्री बनी थीं और उनकी फ़ीस उस वक्त के सबसे लोकप्रिय अभिनेता ऋषि कपूर से भी ज़्यादा थी। वैजयंती माला के बाद दक्षिण भारत से आने वाली वो इकलौती ऐसी अभिनेत्री थीं जिसने हिंदी फ़िल्मों की ख़ातिर हिंदी सीखी थी। पंचतत्वों में लीन हो चुकी इस खूबसूरत अभिनेत्री को उनके प्रशंसकों का आखरी सलाम-

एक ऐसी शख्सियत जिनके जाने से पूरा देश डूब गया शोक की लहर में

संजना सिंह, सीतामढ़ी बिहार से कहती हैं कि रात को जब मैंने फेसबुक में ये खबर पढ़ी तो मुझे ये फेक न्यूज लगी पर कई न्यूज वेबसाइट पर ये खबर देखने के बाद ये बात सच निकली। उनके इस दूनिया में नहीं रखने पर मैं दिल से उन्होंने श्रद्धांजलि देती हूं। कानपुर से हर्षिता वर्मा कहती हैं कि श्रीदेवी ख्वाब की शहजादी थी और वह सबके दिल पर छाई हैं और छाई रहेंगी। फैजाबाद से ललिता कहती हैं कि जब मौत की खबर सुनी तो अफवाह लगी पर काश ये अफवाह होती और वो हमारे बीच होती। सुनीता प्रजापति महोबा से कहती हैं कि उनके गाने, उनकी हंसी और अभिनय मेरे दिल को छू जाता था। लेकिन अब वो अपनी पुरानी फिल्मी काम से ही याद की जाएंगी। वहीं नाजनी चित्रकूट से भी भारी मन से उन्हें आखिरी सलाम करती हैं।