मालेगांव विस्फोट केस पर नर्मी बरतने के आदेश?

2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में दो बम विस्फोट हुए जिनमें सात लोग मारे गए। दोनों विस्फोट मुसलमान लोगों के मोहल्ले में घटे। पुलिस का शक हिन्दू कट्टरपंथी गुटों पर था। कुछ महीनों बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत बारह लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

(फोटो साभार: DNA)
(फोटो साभार: DNA)

मुंबई, महाराष्ट्र। 2008 में हुए मालेगांव आतंकवाद हमले के बारे में सरकारी वकील रोहिणी सालियान ने चैंका देने वाले बयान में कहा कि मोदी की नई सरकार के आने के बाद उन्हें आदेश दिए गए थे कि वे मामले में नर्मी बरतें। उन्होंने ये आरोप खासकर एन.आई.ए. (राष्ट्रीय जांच आयोग) पर लगाया है।

सालियान के मुताबिक 12 जून को एन.आई.ए. के एक अधिकारी ने दूसरी बार उनसे कहा कि वे इस केस में नर्मी से पेश आएं। इसके अलावा सालियान ने बताया कि कुल बारह आरोपियों में से तीन की ज़्ामानत भी हो गई थी क्योंकि एन.आई.ए. ने तीन सालों में इन लोगों के खिलाफ कोई दस्तावेज़्ा कोर्ट को नहीं दिया था। ‘2011 में महाराष्ट्र के आतंकवाद विरोधी गुट ए.टी.एस. ने ये केस एन.आई.ए. को सौंपा। तब से अब तक एन.आई.ए. ने इस केस में ढिलाई ही दिखाई है। हमारे पास जो भी केस है वो महाराष्ट्र ए.टी.एस. की जांच के ही कारण है,’ सालियान ने बताया।

उधर कांग्रेस पार्टी ने आरोपों को गम्भीर बताते हुए एन.आई.ए. के अध्यक्ष का इस्तीफा मांगा। इन आरोपों के बाद सरकार की धर्मर्निपेक्षता पर भी सवाल खड़ा हो गया है। एक तरफ मोदी सरकार देश में प्रशासन को मज़्ाबूत करने का डंका पीट रही है, वहीं रोहिणी सालियान का यह बयान सरकार के नए दौर लाने के दावे पर कई सवाल उठाता है।