मार खात-खात थक गये हन

गांव मा मची हवै तबाही

चित्रकूट जिला मा अत्याचार अउर हिंसा बढ़त जात हवै, पै शासन प्रशासन कउनौ कदम नहीं उठावत आय।  गरीब मड़ई डकैतन के मार से मरा जात हवै, पै सरकार कहत हवै कि उनके राज्य मा कउनौतान के हिंसा अउर अत्याचार नहीं होत आय। पता नहीं सरकार केहिका  हिंसा समझत हवै। हिंया रोज मड़इन के साथै मारपीट होत हवै अउर पुलिस प्रशासन भी वहिमा कुछौ नहीं करत आय? मानिकपुर ब्लाक के डोडा माफ़ी गांव मा या समय डकैतन का आतंक फइला हवै ऊंई गरीब आदिवासिन के साथ बहुतै मार पीट करत हवै। कहत हवै कि हमें खाना चाही? जेहिके लगे खुद खाये का नहीं आय वा भला केहिका खाना खवाई? दूसर कइती डकैतन का कहब हवै कि गांव के मड़ई पुलिस का डकैतन के खबर देत हवै। गरीब मड़इन ना तौ दुई रोटी सूकून के खा पावत आय ना तौ बनी मजदूरी कइ पावत आय आखिर कबै तक अत्याचार होत रही मड़इन के साथै? चित्रकूट से कत्तौ डकैतन का आतंक खतम होई? विधायक आर.के.पटेल. का कहब हवै कि डकैतन का ढूढ़-ढूढ़ के निकाला जई, पै कबै? जब मड़ई मर जइहैं तबै, का करत हवै सरकार? कत्तौ सोचिस हवै कि मड़ई कसत मार झेलत होइहैं?