मारपीट को कारन अधिकारी जिम्मेंदार?

b panchyat chunava photoप्रधानी के चुनाव होंय के दो महिना पेहले से आचार संहिता लागू हो गई हती। जीसे केनऊ तरह की लड़ाई झगड़ा, दबाव प्रचार प्रसार ओर लालच न दओ जा सके। पे ई सब कामन में प्रसासन न काम नजर आई हे। आचार संहीता लागू होंय के बाद भी फर्जी वोट, लालच देय ओर मारपीट के मामला सामने आये हे? जभे की जा सब बन्द करें के लाने दो महीना से मीटिंग बैठक ओर अधिकारियन को गांवन में भ्रमण होत हे?
अगर कोनऊ गांव को आदमी आवास, शौचालय जा फिर सड़क जेसी समस्या की दरखास लेके जात हे तो आचार संहिता लागू होंय की बात कहके टार देत हे।
सवाल जा उठत हे की का काम के लाने आचार संहीता लागू करी जात हे जा फिर कोनऊ तरह के प्रचार प्रसार के लाने जीसे लड़ाई ओर मारपीट न होंय। आचार संहीता के बहाने ही कर्मचारियन खा काम करें छुटकारा मिल जात हे। सोचे वाली बात तो जा हे पहले चरन में प्रधानी के होंय वाले चुनाव में जिला निर्वाचन अधिकारी डी.एम. वीरेश्वर सिंह ओर एस.पी. वजीह अहमद बूथन में जांच के लाने गये पे कोनऊ की नजर चिचारा गांव में नई गई हे। जभे की एक केती चुनाव बूथ ओर दूसरी तरफ प्रचार प्रसार होत हतो। जभे ईखे बारे में बात करी तो जिला निर्वाचन अधिकारी डी.एम. ने कहो की प्रचार होत हे तो का भओ लड़ाई न होंय खा चाही? न लड़ाई की कोनऊ सूचना हे।
अब सावल जा उठत हे की अधिकारी भी लड़ाई दंगा ओर मारपीट को इन्तजार करत रहत हे। काय से मेन रोड के किनारे एक केती बूथ ओर दूसर केती प्रचार प्रसार। जभे मेन रोड के गांव को जा हाल हे तो अन्दर गांव में का होत होहे। एई कारन हतो की गुगौरा गांव में दो प्रत्यासी आपस में भिड़े ओर मारपीट की सम्भवना बनी। जभे की सूचना के अनुसार अधिकारी मौंके में पोहोंच समझा बुझा के मामला शान्त कराओ ओर अपराधियन खा पकर जेल भेजो हतो। जभे अधिकारी अपने काम में इत्ती लापरवाही करत हे तो कर्मचारी काय न करहें। सोचे ओर जनता के लाने जा बोहोतई बड़ी बात हे?