मातृ दिवस के अवसर पर, चित्रकूट, यूपी पुलिस प्रशासन के नाम एक माँ का खुला खत

सुना है आज मदर्स डे [मातृ दिवस] मनाया जा रहा है, लेकिन उस माँ का क्या, जो महीनों से अपनी बेटी के न्याय के लिए पुलिस प्रशासन के चक्कर काट रही हो?

अपराधी खुलेआम बाहर घूम रहा है, मुझे कई बार दिखता है।तो आप ही बताइए, क्या मैं इस दिन को मदर्सड़े के रूप में मनाऊं? किस तरह अपने मन को स्थिर करूं, जब मैं खुद ही इन्साफ के लिए भटक रही हूं? जब मैं अपने दिल के टुकड़े के लिए लोगों के हाथ पैर जोड़ रही हूं?

मैं हूं नीवी की माँ रानी। नीवी तो अब दुनिया में नहीं रही, लेकिन आज भी मुझे लगता है जैसे वो मुझे बुला रही है, उसकी चीख ‘माँ मुझे बचा लो’, ऐसा लगता है मेरा कानों से ये आवाज़ कभी नहीं जाएगी।जबकि ये चीखें मैंने तो सुनी भी नहीं, इन चीखों को तो उसने सुना होगा, लेकिन फिर भी उस राक्षस ने उसे नहीं छोड़ा, खत्म कर दिया मेरी नीवी को|

अपने परिवार के साथ पिछले बीस साल से कर्वी में लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता के मकान में मैं रहती थी। लक्ष्मी प्रसाद और उसका बेटा राजा किराने की दूकान चलातें हैं| मेरे परिवार में मेरी चार लडकियां और एक बेटा।14 जनवरी 2017 की वो काली रात मैं कभी नहीं भुला पाउंगी, जब नीवी घर से लापता थी| मैं और मेरे पति घर चलाने के लिए शादी में बर्तन धोने का काम करते हैं| उस रात भी हम घरों में काम करने गये थे|बच्चों से बोल गई थी कि खाना खाकर सो जाएं। मुझे क्या मालूम था कि नीवी हमेशा के लिए सो जाएगी।

जब मैं रात में घर आई, तो नीवी नहीं थी। बच्चों ने कहा कि अंकल के यहाँ टीवी देख रही है, मैं रात में बुलाने गई, तो लक्ष्मी प्रसाद के बेटे राजा ने कहा कि नीवी वहां नहीं आई थी। मुझे उसका जवाब कुछ अजीब लगा और मैंने बार बार पूछा, लेकिन उसका जवाब वोही था।मैं रात भर उसे ढूँढती, यहाँ से वहाँ भटकती रही, पर कुछ पता नहीं चला।सुबह राजा घर आया और उसने कहा, ‘भाभी जी, नीवी की लाश भरे मोहल्ले में पड़ी है, एक बोरे में है।’ मैं भागकर वहां गई लेकिन तब तक वहां पुलिस भी आ गई थी और बोरे को उठाकर चीर घर ले गई थी। मैं रोती रही, ‘मेरी नीवी को दिखा दो, एक बार दिखा दो।’ बोरे से बाहर उसके पैर दिख रहे थे। चीरघर में मैंने नीवी को देखा, उसकी लाश को, उसके पूरे शरीर में दांत से काटने के निशान थे।

मुझे पता था कि ये राजा ही है।

मेरी लड़की ने क्या बिगाड़ा था राजा का, जो उसने उसके साथ ऐसा किया, और किस तरह का इंसान है वो, ऐसे करने के बाद वह खुद ही मुझे बताने आया। इसके बाद लाश को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया और मेरी नहीं सुनी। 14 जनवरी के बाद मैंने अपनी सुनवाई के लिए क्या नहीं किया।अपने बच्चों को भूखा प्यासा छोड़ कर मैं पुलिस के चक्कर काटती रही, कभी सीओ से मिली,कभी एसपी से, तो कभी कोतवाली के चक्कर, लेकिन पुलिस वाले हमेशा एक ही बात बोलते, कि आज नहीं कल आना।ऐसे तीन महीने बीत गए।

इसके बाद मैने संस्थाओं और पत्रकारों का सहयोग लिया,तब जाकर चार महीने बाद मेरी कुछ सुनवाई हुई, और राजा को पुलिस ने पकड़कर जेल में डाल दिया।उसके परिवार के लोग मुझे पैसे का लालच दे रहे थे, कह रहे थे केस को दबा दो, समझौता कर लो, लेकिन मैंने तो लड़की खोई,पैसे लेकर क्या करती मैं? मैं अपने में पक्की रही,ये सोचते हुए की आज जो मेरी बेटी के साथ हुआ, कल और लड़की के साथ हो सकता है। राजा जेल से चार महीने के बाद पैसों के बल पर जमानत पर बाहर आ गया, लेकिन उसे सज़ा मिलनी चाहिए। इसलिए मैं अभी भी न्याय की लड़ाई लड़ रही हूं। राजा को सज़ा मिलनी ही चाहिए। इसलिए आज भी मैं पुलिस प्रशासन के चक्कर लगा रही हूँ, और आज भी कोई सुनवाई नहीं है।

अब मुझे डर भी है, कि पैसों के बल पर मुझे, मेरे पति या बच्चों को कुछ हो ना जाए। हमारे लिए कोई सुरक्षा नहीं दी गई है। पुलिस लगातार ये कहती है कि राजा को जितनी सज़ा मिलनी थी, उसे मिल चुकी है। लेकिन ये कहाँ का कानून है, और कहाँ का इंसाफ है?

नीवी मेरी सबसे सीधी बच्ची थी। बिल्कुल मासूम, हमेशा कहना सुनने वाली। पढ़ने में भी तेज़ थी, लेकिन मैं उसे दूसरी कक्षा के बाद पढ़ा नहीं पाई, ये बात मुझे हमेशा सताएगी। लेकिन उसका इस तरह से खत्म हो जाना, ये कोई कैसे सोच सकता है? एक माँ, तो कभी नहीं।

आरोपी को तत्काल सज़ा मिलनी चाहिए, उसमें कानून व्यवस्था ढीली नहीं होना चाहिए, तभी हम इस तरह के केस को आगे रोक पाएंगे| मुझे अपनी नीवी तो वापस नहीं मिलेगी, लेकिन उसकी याद में मैं तो इतना तो कर सकती हूं, कि जिसने उसके साथ बलात्कार किया, जिसने उसकी हत्या की, उसे सज़ा दिलवाऊं?

आज मदर्स डे है, क्या आज एक माँ की सुनवाई होगी?

(नीवी बछरन गॉंव, कर्वी, चित्रकूट की रहनी वाली 14 साल की बच्ची थी। जनवरी 14 2017 की रात उसके साथ बलात्कार किया गया, और फिर उसे मार दिया गया। नीवी की माँ, रानी, 15 जनवरी से इस पर एक लड़ाई लड़ रही है। मार्च 19, 2018 को ख़बर लहरिया द्वारा आयोजित बुंदेलखंड बैठक में भी रानी ने इंसाफ के लिए आवाज़ उठाई थी। इस पर मऊ मानिकपुर से भाजपा विधायक आर के पटेल का कहना था की अगर घटना भाजपा सरकार के राज्य में आने से पहले की है, तो उसमें वे कुछ नहीं कर सकतें। रानी को रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष से 10 लाख रुपय मुआवजा दिया गया है।)