महोबा जिले के सुदामापुर और कनेरी गाँव में आंगनवाड़ी की तरफ से नहीं कोई ध्यान, बच्चे हैं कुपोषित

जिला महोबा, गांव कनेरी और सुदामापुरी में आगनवाडी की तरफ से नइ हो रओ कोनऊ ध्यान पांच मोड़ी मोड़ा कुपोषित हे लेकिन न उनकी उचित देखभाल हो पा रइ न कोनऊ इलाज।
नीलम ने बताई के हमाई मोड़ी एक महीना से कुपोषित हे हमने आगनवाडी में बजन करवाओ तो सो दीदी बता रई ती के तुमाई मोड़ी कुपोषित हे। खाबे के लाने अकेली पजीरी मिलत बस।
शोभा ने बताई के बीच बीच में हो जात बीमार सो बजन कम हो जात अबे तो दस किलो बजन हे पंजीरी पांच, पन्द्रह, पच्चीस को मिलत। रजनी ने बताई के हमे दो रसीद मिली ती सो हम अपनी मोड़ी को अस्पताल में लिबा गए ते उते चार दिना भर्ती रई लेकिन कछू आराम नइ परो। उते केवल खाबे के लाने दूध दरिया मिलत तो।
कौशल्या आगनवाडी कार्यकर्ता ने बताई के अबे तो कुपोषित के लाने अलग से कछु नइ आत। बोई पजीरी जो सब बच्चन के लाने आत दस दिन के अंतराल में बांटबे के लाने सो कुपोषित बच्चन को दो देत और कछु नइ आत और अगर सरकार से आबे तो हम सब बांटबे लेकिन हम सबके घरे जाके सलाह देत के दिन में तीन चार बार खाना खबाओ और हरी सब्जी दूध घी खबाओ अगर घी नइया तो तेल ही खबाओ। अच्छो बना बना के जी से बच्चन को बजन बढ़ हे साफ़ फाई को ध्यान रखो।
भारती ने बताई के अलग से कछु नई मिलत लेकिन अबे एक सौ बाईस रुपईया और एक पांच सौ ग्राम को घी को पैकेट मिलत सो बो हम दे देत और सबेरे के लाने तीन से छह साल के बच्चन के लाने नाश्ता आत फल के बिस्कुट आत पच्चीस दिना के लाने बस।
यासमीन सी डी पी ओ ने बताई के चाह बच्चा तीन चार या छह साल को होबे सबको पचास ग्राम देत और जो बच्चा कुपोषित हे तो उन्हें पछत्त ग्राम देत और अगर ज्यादा कुपोषित हे तो उन्हें एन आर सी में भर्ती करवात। फिर बाद में बच्चन को और उनके मताई बाप को रुपईया भी मिलत।

रिपोर्टर- सरोज

11/01/2017 को प्रकाशित