महोबा जिले के सुगिरा गांव में काम करने के दो साल बाद भी नहीं मिली मजदूरी

जिला महोबा, ब्लाक जैतपुर, गांव सुगीरा   हम सब सरकारी नौकरी और योजना से जुड़ के काम करबो चाहत जीको कारन उचित वेतन मिलबे की गारन्टी हे। लेकिन अगर जे कामन में भी आदमियन को रुपइया न दओ जाबे तो एसो ही भओ सुगीरा गांव में जिते दो हजार पंद्रह में मनरेगा के तहत मजदूरन ने विधुत विभाग के लाने खंती को काम करो। लेकिन दो साल हो जाबे के बाद भी मजदूरन के रुपइया नइ मिले।जिला महोबा, ब्लाक जैतपुर, गांव सुगीरा   हम सब सरकारी नौकरी और योजना से जुड़ के काम करबो चाहत जीको कारन उचित वेतन मिलबे की गारन्टी हे। लेकिन अगर जे कामन में भी आदमियन को रुपइया न दओ जाबे तो एसो ही भओ सुगीरा गांव में जिते दो हजार पंद्रह में मनरेगा के तहत मजदूरन ने विधुत विभाग के लाने खंती को काम करो। लेकिन दो साल हो जाबे के बाद भी मजदूरन के रुपइया नइ मिले। वीरेन्द्र कुमार कुशवाहा ने बताई अब जब काम शुरू होने चाहिए जब हमाओ पुरानो रुपइया मिल जाए। हमे चार महीना हो गये पूरे काम करत करत। तीन सौ पैसठ खंती डारी जीमे से हमे पच्चीस हजार रुपइया मिले। पैतीस चालीस हजार रुपइया अबे फंसे हे अब हम ओरे का करे। जो जेई साब हते जिन ने खंती नापी ती बे बदल गये नए आ गये बे कह रए जिते तुम ओरन ने खंती डारी बे कागज देओ। बे कागज इन ओरन ने खो दए सचिव और प्रधान ने न हमे जाब कार्ड में चढ़ो  के हमने काम करो। प्रेमचंद्र ने बताई रुपइया मिल ही नइ रए हमाय जिन ने काम करवाओ उन से कओ सो कत के हओ डरवा देहे। एसे एसे एक साल हो गयी ना पुरानो रुपइया मिल रओ न काम मिल रओ। हमाय बाईस हजार रुपइया फसे। मालती ने बताई दो साल पहले हम छह आदमियन ने डारी ती खंती मिल के। राजेश कुमार रोजगार सेवक ने बताई के काम पे जाब कार्ड लेयातई नइ हते घरे रख लेत ते। रुपईया पास बुक में पहुच जात। निजाम अली ग्राम विकास ने बताई के बाको कोनऊ प्रावधान ही नइया न काम को इस्टीमेट बनो। इस्टीमेट बनत तबई काम लगत। और रोजगार सेवक के रए के हमने इन्हें काम पे लगाओ ही नइया उन ओरन ने जाब कार्ड भी नइ दिखाओ।

रिपोर्टर- श्यामकली

Published on Jul 6, 2017