महोबा के चरखारी में पेड़ लगाने वाले मज़दूरों को नहीं दिए पैसे

जिला महोबा, ब्लाक चरखारी एते वृक्षारोपण के द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्व रिकार्ड टोरो। लेकिन महोबा के चरखारी में पेड़ लगाबे वाले मजदूरन को नई दई मजदूरी।
चरखारी ब्लाक के रैबे वाले मनोज ने बताई के हमने वन विभाग में वृक्षारोपण को काम करो लेकिन हमे एकउ रुपजा मजूरी नई मिली। बलराम ने बताई के जो अठारा तारीक को जो पांच हजार वृक्षारोपण भये ते।उनको अबे तक पैसा नई मिलो।के रए ते के तेरह तारीक को मिल जेहे।लेकिन अबे तक नई मिलो।
दयाल ने बताई के हम मजूर आदमी हें। और अगर रूपजा न मिल हें तो का खैहे और का कर हें। कर्जा काड़ के अपनों खर्चा चला राये।अगर मजूरी न मिल हें तो का हुए आधे अधूरे पईसा मिल रये।कोऊ के पांच हजार रुके तो कोऊ के दस हजार और कोऊ के पूरे रुके।
पैले के रए ते के तेरह तरीक को देदे।फिर के रए ते के अठारा को दे दे। लेकिन अबे तक एक पईसा नई मिलो।गडडा को भी पईसा नई मिलो।
सुखराम ने बताई के शिकात भी करी। महोबा गये चरखारी गये लेकिन कोऊ नई सुन रओ अब का करे। का कोऊ को मारन लगे के खुद मर जाबे। वनगोपाल ने बताई के हमने इतनी मेंनत करी।एेसे घाम में गडडा खोदे और पौध लगाई।लेकिन अब देखो सो कोऊ नई सुन रओ। अगर नई मिले तो हमाये घर वाले तो भूकन मर जेहे। मजूरी करके तो पाल रए हें।और बई न मिले तो का करे का खे हें। कीके द्वारे जेहे। रुशबिंद ने बताई के हमने पौधा लगाये हें और लगवाये हे। अब बताओ हम कैसे पईसा दुसरे के देहे। और अपने निकारे।हमाई तो भज्जा जोई बिनती हें के हम ओरन को पईसा मिल जाबे।
रिपोर्टर- श्यामकली 
30/07/2016 को प्रकाशित

वृक्षारोपण द्वारा यू पी सरकार ने विश्व रिकॉर्ड तोड़ा
लेकिन महोबा के चरखारी में पेड़ लगाने वाले मज़दूरों को नहीं दिए पैसे