महोबा का ये गाँधी आश्रम, कभी था लोगों का सहारा आज खुद हो गया बेसहारा

जिला महोबा, शहर महोबा में खुलो क्षेत्रीय गांधी आश्रम फैशन और महगाई के कारन अब घाटे में और बिक्री की कमी के कारन भी मजदूरन को वेतन कम करने परो।
राकेश कुमार शुक्ल श्री गांधी आश्रम ने बताई के खादी वस्त्र पे छूट दई जात ती बामे बीस प्रतिशत केंद्र सरकार की हती दस प्रतिशत प्रान्त सरकार की। हमने तो तुरंत ग्राहकन को छूट दे दई जब हमने शिकायत करो तो हमाई तीन साल रोक लई।
फ़ैशन और महगाई ने काम को बंद होबे की परेशानी में डार दओ। बाजार में भी सस्ते मिलबे वाले कपड़न ने भी खादी को प्रभावित करो। लेकिन आज अगर कोऊ बाजार से शर्ट लेत तो छह सात आठ सौ की मिल हे और हमाय ते आज भी तीन चार पांच सौ की मिलत। शुद्ध खादी और सूती हे। खादी महंगी नइया बल्कि सस्ती हे।
जा को सीधो असर कारखाने के मजदूरन पे भी परो महोबा जिला के क्षेत्रीय गांधी आश्रम में जंहा चार हजार मजदूर काम करत ते अब केवल चौरानबे मजदूर काम करत हे।
मेकु ने बताई के गांधी आश्रम से छोड़ के कछू दिन मजूरी करी बाके बाद फिर अपनों धधो डार लओ। मीरा ने बताई के न अब कोनऊ धंधो हे न कोनऊ रूपईया हे। छोटे छोटे मोड़ी मोड़ा हे शादी ब्याह को परेशान हो रए। हजारन आदमी काम करत ते बाहर के भी मजूर काम करबे आत ते। और अब कछू जने दिल्ली चले गये।
एसो नइया के केवल मजदूर ही परेशान हो रए बल्कि क्वालिटी पे भी असर परो। हमाय धंधे पे भी असर परो। जो हम बंगाल और मशहूर की टक्कर देत ते बो भी नइ दे पा रए। का प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया में गांधी जी के स्वदेशी आन्दोलन जो सपने देश में मिलबे वाले सामान और और आदमियन को मिलबे वाली सोच हती वो पूरी कर पेहे।

रिपोर्टर- श्यामकली

07/04/2017 को प्रकाशित