महिला पत्रकारों की कलम से – गाय राजनीति या राजनीति ही गाय 

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प्रियंका सिंह

प्रियंका सिंह, पिछले कई सालों से अल्पसंख्यकों और वंचित तबकों के बारे में स्वतंत्र लेखन कर रही हैं। अल्पसंख्यको और दलित तबकों के  आंदोलनों से भी जुड़ी हैं। 

28 सितम्बर की रात को गोमांस खाने के संदेह में दादरी के बिसहड़ा गांव में उग्र भीड़ ने 50 साल के अखलाक की हत्या कर दी और उनके बेटे दानिश की भी पिटाई की जिसका फिलहाल इलाज चल रहा है।
घटना के बाद जो राजनीतिक मोड़ इस हत्याकांड में लाया गया है उसने देश की छवि को पूरी दुनिया के सामने शर्मसार कर दिया है। नेताओं के लगातार बढ़ते ऊलजलूल बयानों ने इस घटना को सांप्रदायिक मुद्दा बना दिया है। भाजपा के केंद्र में आने के बाद देश में इस तरह की घटनाएं रोज़ ही हो रही हैं। निश्चित ही ऐसी घटनाओं का होना योजनाबद्ध होता है। समय-समय पर देश में हिन्दू-मुस्लिम का ज़हर फैलाने वाली भाजपा और आरएसएस भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने में लगी है। जिसका उदाहरण इसी घटना के बाद भाजपा नेताओं के आते बयानों के द्वारा हमारे सामने है।
भाजपा नेता महेश शर्मा ने पीडि़त परिवार से मुलाकात की और कहा कि गाय काटने की अफवाह की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप ये हत्या हुई है। सबसे बड़ी बात ये कि महेश शर्मा ने कहा कि घर में मृतक अखलाक की बेटी भी थी, लेकिन किसी ने उसे छुआ भी नहीं…..मतलब? इस दया के लिए भारत की महिलाओं को इनका शुक्रगुज़ार होना चाहिए? या उस लड़की को डरना चाहिए? या ये बात कह कर महेश शर्मा आरोपियों को और उनके जैसों को आगे के लिए उकसा रहे हैं? या फिर ये बता रहे हैं कि तुमसे ये गलती हो गई?
इसके बाद आगे की रही सही कसर संगीत सोम ने यह कह कर पूरी कर दी कि अगर हिंदू समुदाय के निर्दोष लोगों को ‘फंसाया’ गया तो हिंदू मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम हैं। बाकी जितनी कीलें ठोकनी हैं वो नवाब नागर, ओवैसी, साक्षी, साध्वी प्राची, योगी आदित्यनाथ, आज़म खान, संजीव बालियान आदि ठोंकने में लगे ही हैं। इन सबसे कहीं बेहतर सरताज है जो अपने पिता को खोने के बाद भी हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे की बात करता है। उसे अभी भी यकीन है कि ‘सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा’।
दरअसल धर्म ने हमेशा बढ़ते समाज की हत्या की है। धर्म लोगों के विवेक को, उनकी संवेदनाओं को नष्ट कर देता है। और ये धर्म की राजनीति अभी की नहीं बल्कि प्राचीन काल से ही चली आ रही है। जहाँ कुछ चतुर और धूर्त लोगों ने धर्म को अपना प्रभावी और ताकतवार हथियार बना कर लोगों को आपस में लड़ा कर उन पर राज किया था। दुनिया भर में नज़र दौड़ा के देखिए जितनी भी घटनाएं मिलेंगी उन सभी घटनाओं में धर्म कहीं न कहीं पृष्ठभूमि में अपनी उपस्थिति ज़रुर दर्ज करा रहा होगा। बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों को अपनी मुट्ठी में दबाए रखने का सबसे उत्तम साधन धर्म ही है।
कौन क्या पहने, क्या खाए, कितने बच्चे पैदा करे, किस्से प्रेम करे, क्या पिए- अब ये सब कुछ आरएसएस और भाजपा नेता तय करेंगे। ये स्थिति अत्यंत भयावह है और हमें इस पर चिंतन करना होगा कि देश किन हाथों में सौंप दिया है हमने। देश में बारहवीं पास, मैट्रिक फेल लोगों का शासन है। जहां की जुमली सरकार रोज़ जुमलेबाज़ी करती है और गरीबों को खाने-पीने की नसीहतें देना ही अपना प्रथम राष्ट्रीय कर्तव्य समझती है। ये लोग एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करने के लिए कृतसंकल्प हैं, जहां गाय बेडरूम में पगुराएगी और इंसान गौशाला में बांधा जाएगा और क्या खाएं, क्या न खाएं इसका निर्णय दिल्ली से किया जाएगा।
दादरी की जघन्य घटना के विरुद्ध हर मानवता प्रेमी नागरिक, दोषियों की निंदा कर रहा है और पूरे देश में इसके लिए प्रदर्शन हो रहे हैं।