महिला पत्रकारों की कलम से – मध्य प्रदेश में बदतर होती दलितों की स्थिति

rituऋतु सक्सेना करीब आठ सालों से पत्रकारिता कर रही हैं। इस समय ये दैनिक हिंदुस्तान में काम कर रही  हैं। इससे पहले वे दैनिक भास्कर और इंडिया न्यूज़ में काम कर चुकी हैं।
एक ओर तो केंन्द्र सरकार सबका साथ सबका विकास के दावे करती है लेकिन केन्द्र की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा षाषित मध्य प्रदेष में दलितों की स्थिति अभी भी बदतर है। यूं तो देषभर में दलितों पर अत्याचार हो रहे हैं। लेकिन मध्य प्रदेष में तो उनका जीना दूभर होता जा रहा है।
इसी महीने मध्य प्रदेष के छतरपुर जिले के मंुडवारा गांव में एक महिला को नंगा कर पेषाब पिलाने का मामला सामने आया।26 अगस्त को हुई यह घटना सितंबर के षुरूवात में सामने आई। घटना का संबंध जमीनी विवाद से है। दबंग परिवार के दबंगई का षिकार हुई महिला की षिकायत पर रिपोर्ट तो दर्ज हुई लेकिन अभी तक किसी को गिरफतार नहीं किया गया। इतना ही नहीं प्रदेष के अलीराजपुर जिला मुख्यमंत्री से 15 किलो मीटर दूर घटवानी गांव के दो सौ दलित कुएु का गन्दा पानी पीने को मजबूर हैं। क्योकि दबंग उन्हें हैंडपम्प का पानी नहीं भरने देते। वहीं राज्य के अस्सी प्रतिषत दलितों को मंदिरों में जाने से रोक है। नेषनल काउंसिल आंफ एप्लाइड इकोनाॅमिक रिसर्च (एनसीएईआर) और अमेरिका की यूनिवर्सिटी आॅफ मैरिलैंड के एक अध्ययन के अनुसार छुआछुत को मनाने में मध्यप्रदेष पूरे देष में षीर्ष पर है। सर्वे में मध्य प्रदेष में तिरपन प्रतिषत लोगों ने माना कि वे छुआछुत को मानते हैं।
यह तो केवल कुछ आंकड़े हैं जो प्रदेष में दलितों की स्थिति को बयां करते हैं। असल तस्वीर तो इससे कहीं ज्यादा भयानक है। यूं तो प्रदेष सरकार दलितों के उत्थान की बात करती है। लेकिन ऐसी घटनाएं सोचने को विवष करती हंै कि ये बातें कितनी सच हैं। केन्द्र सरकार का दावा है कि वह देष को भयमुक्त बनाएगी लेकिन जब देष के एक बडे़ प्रदेष में दलित आबादी की हालत यह है तो यह दावा ठोस नहीं लगता।