महिला पत्रकारों की कलम से… – लालू-नीतीश गठजोड़ पर जनता उठा रही सवाल

महिला पत्रकार की कलम से में पढि़ए बिहार से चुनावी हल चल की खबर। उत्तरी बिहार के सीतामढ़ी और शिवहर जिलों में हमारी महिला पत्रकार नेटवर्क द्वारा राज्य में होने वाले विधान सभा चुनाव का विश्लेषण हम आप तक पहुंचा रहे हैं।

(फोटो साभार - शिवम सेतु | विकिपीडिया)
(फोटो साभार – शिवम सेतु | विकिपीडिया)

बिहार में इन दिनों चुनावी चर्चा तेज है, वहां अक्टूबर-नवंबर में विधान सभा चुनाव होने हैं। साथ ही इस बार तो कुशासन बाबू लालू प्रसाद यादव और सुशासन बाबू नीतीश कुमार ने हाथ भी मिला लिया है। जनता के मन में सवाल है कि कुशासन पर सुशासन हावी होगा या सुशासन पर कुशासन? लोग नीतीश के काम से खुश हैं मगर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर लालू से हाथ क्यों मिलाया?

जिला शिवहर, ब्लाक तरियानी, गांव सरवरपुर के सुरेंद्र कुमार का कहना है कि लालू और नीतीश एक साथ कैसे काम करेंगे ? पहले तो नीतीश ही सारे फैसले लेते थे मगर अब तो इनमें लालू का दखल होगा। इसी जिले के ब्लाक शिवहर के गांव कुशहर के राजकुमार, लाल बाबू महतो भी सोच में है कि हम नीतीश को अगर वोट देने की सोचेंगे तो लालू भी सत्ता में आ जाएंगे। फिर विकास ठप हो जाएगा और गुंडाराज शुरू हो जाएगा। वहीं तरियानी ब्लाक के गांव खादेपुर की किरन देवी तो सरकार ही बदल देना चाहती हैं। इनका कहना है कि लालू के राज में औरतें बिल्कुल सुरक्षित नहीं थीं। भले ही लालू के साथ नीतीश ने हाथ मिलाया हो मगर लालू के सत्ता में आते ही दोबारा वही सब होने लगेगा। इसलिए इस पार्टी की जगह दूसरी पार्टी को ही हम चुनेंगे। कुल मिलाकर जनता नीतीश और लालू के गठबंधन को लेकर तनाव में है।

लालू यादव का राज बिहार में 1990 से करीब साल 2000 तक रहा। 1997 में चारा घोटाले में फंसने के कारण उनकी पत्नी राबड़ी देवी ने पद संभाला। हालांकि पीछे से लालू यादव और उनके साले साधू यादव ही सत्ता संभाल रहे थे। कुल मिलाकर पंद्रह सालों तक लालू का राज रहा। यह पंद्रह साल कुशासन के तौर पर जाने जाते। जनता परेशान हो गई। और जनता दल के नीतीश कुमार को 2005 में जिताया। नीतीश तीन बार लगातार मुख्यमंत्री बने। 2014 जून में खुद राजनीतिक उठापटक के चलते महादलित जीतनराम मांझी को पद सौंपा। लेकिन साल भीतर ही राम मांझी को हटाकर खुद पद संभाला।