महिला पत्रकारों की कलम से… – तालाब के गंदे पानी से प्यास बुझा रहे हैं दलित परिवार

सुनीता कसेरा
सुनीता कसेरा

अब हर हफ्ते खबर लहरिया में पढ़ें महिला पत्रकारों की कुछ खास खबरें। राजनीति, विकास, संस्कृति, खेल आदि की ये खबरें देश के कोने-कोने से, छोटे-बड़े शहरों और अलग-अलग गांवों से हैं। इस हफ्ते, पढ़ें सुनीता कसेरा की खबर। सुनीता राजस्थान के करौली जिले में सात साल से रिपोर्टिंग कर रही हैं। वो खासकर ज़्ामीनी और विकास से जुड़ हुए मुद्दों को खोजकर रिपोर्ट करती हंै और इनपर छोटे वीडियो बनाती हैं।

जि़ला करौली, राजस्थान। करौली जि़ले की मंडरायल तहसील में गोपालपुरा नाम का गांव है। यहां पिछले डेढ़ साल से मजबूर होकर गांववाले गन्दा पानी पी रहे हैं।

मैंने एक दिन सुना कि गोपालपुर गांव की स्थिति बहुत खराब है और गांव गई। यह पहाड़ी इलाके में पड़ता है और यहां एकमात्र पानी का स्त्रोत एक तालाब है जहां पहाड़ों का पानी इकट्ठा हो जाता है। गर्मियों में तालाब में मिट्टी भरी रहती है। उस तालाब में ही गाय – भैंस नहाते हैं और उसी पानी को गांव के लोग अपने घर के काम के लिए लेते हैं। स्थिति को देखकर मैं भी घबरा गई कि ये लोग कैसे अपना जीवन यापन कर रहे हैं?

गोपालपुर गांव में सत्तर घर हैं, और सारे परिवार दलित हैं। गांव के निवासी राम निवास, राम चरण, रघुवीर और राज कुमारी ने कहा, ‘गांव में दो हैंडपंप और एक बोरिंग है, और किसी में भी पानी नहीं आता है। हम गांव से तीन किलोमीटर दूर किसी के निजी बोरिंग से पानी लाते हैं।’ उनके पास और कोई विकल्प नहीं है। गांव की सरपंच से मिलना था, पर वे करौली में अपने बच्चे के एडमिशन के लिए गई हुई थीं।

वहां से मैं करौली जि़ले में सिविल इंजीनियर, ए.सी. चैहान से मिली। गोपालपुरा की स्थिति के बारे में सुनकर वे भी चैंक गए। उन्होंने तुरंत ब्लॉक में अधिशासी अभियंता को आदेश दिया कि गांव में टंकी भेजी जाए। खबर कवर करने के दो दिन बाद ही गांव में रोज़्ा टंकी पहुंचने लगी है।

यदि इस गांव में किसी दूसरी जाति के लोग रह रहे होते तो शायद ऐसी स्थिति नहीं होती। फिल्हाल तो इन लोगों को साफ पानी मिल रहा है पर आगे क्या व्यवस्था हो पाती है देखना होगा।