महिला क्रिकेट की क्रांति

साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

महिला और पुरुषों के क्रिकेट को कभी समान दर्जा नहीं मिला इसलिए ही कभी महिला खिलाड़ियों का नाम पुरुष खिलाड़ियों की तरह नहीं चमकता है और ना खिलाडियों को उतना सम्मान मिलता है। 80’s के दशक में भारत की स्टार महिला खिलाड़ी डायना एडुलजी भी ऐसा ही नाम थीं। उनके नाम पर सबसे ज़्यादा गेंद फेंकने का रिकॉर्ड है, उन्होंने 5,248 गेंदे फेंकी थी। उनके बाद झूलन गोस्वामी और मिताली राज जैसी अच्छी खिलाड़ियों के नाम भी आपने सुने होंगे।

पर बहुत कम ही लेखक हैं, जो महिला क्रिकेट को नजदीकी से देखते और लिखते हैं और अंदरुनी बातों, अच्छी और बुरी बातों की समझ रखते हैं। खैर, आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम श्रेष्ठ टीमों की गिनती में है और वर्तमान और भूत महिला खिलाड़ियों का संघर्ष है, जिसमें डायना एडुलजी का नाम प्रमुख है। उन्होंने बहुत सी परेशानियों का सामना किया, क्योंकि उस समय तो महिला क्रिकेट की पहचान आज के मुकाबले कुछ भी नहीं थी। आज तो महिला क्रिकेट के नियम पुरुष क्रिकेट की तरह होने लगे हैं। पर यहां तक आने के लिए बहुत बड़ी यात्रा पूरी करनी पड़ी है।

पिछले कुछ महीनों में महिला क्रिकेट में श्रेष्ट आठ टीमें अपने तेवर में आ गई थी, जिसमें भारत बनाम वेस्टइंडीज, श्रीलंका बनाम इंग्लैण्ड, न्यूजीलैंड बनाम पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया बनाम साउथ अफ्रीका है। इनमें से कुछ टीमें शीर्ष में आ गई। पर जिसमें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड और न्यूजीलैण्ड जैसी टीमें नहीं थी।

साथ ही वेस्टइंडीज 22 पाइंट के साथ चौथे स्थान आती है, जबकि भारत 19 पाइंट के साथ पांचवें स्थान पर स्थान पाती है। आज महिला क्रिकेट को लोग देख रहे हैं, पर ये छोटी सी पहल है, जो आगे बड़ी बन जाएगी। खैर अभी महिला क्रिकेट की स्थिति पुरुष क्रिकेट की जैसी बनने में बहुत काम करने की जरुरत है।

साभार: विज़डेन इंडिया