महिला किसान यानी महिला और किसान दोनों की परेशानियों से जूझना

कहा जाता है कि भारत कृषि प्रधान देश है इसके बावजूद भी किसानों की हालत दयनीय है। और अगर  बात महिला किसानों कि जाये तो उनकी स्थिति पुरुष किसानों से भी बेकार है देश में 60 से 80 प्रतिशत महिला खेती के काम में लगी रहती हैं। जमीन का मलकाना हक कि बात अगर करे तो सिर्फ 13 प्रतिशत महिलाओं के पास है।
आइये हम मिलाते हैं आपको जिला झांसी, गांव खुजुराओ बुजुर्ग कि किसान महिला रामवती से उन्होंने बताया कि वो किसानी का पूरा काम करती हैं। उनका पति शराब पीता है और उसको मरता है घर से निकाल देता है। जमीन,जायदाद में उन्हें कोई अधिकार नहीं मिला। और बाजार में होने वाला शोषण भी उन्हें फसल कि अच्छी कीमत दिलाने से दूर कर देता है महिला किसान का काम सिर्फ खेती का नहीं बल्कि घर में पशु पालन का भी काम करती।
महिला किसानों का योगदान देखते हुए 15 अक्टूबर को महिला किसान दिवस मनाया जाता है।11 करोड़ 87 लाख किसानों की कुल आबादी में से 30.3 महिला किसान है। रामवती का कहना है कि महिला किसानों के जितने भी अधिकार हैं  उन्हें मिलना चाहिए। पुरुष  कौशल वाले काम ज्यादा करते हैं  जब कि महिला किसान मेहनत वाले काम जिसके कारण ही संयुक्त राष्ट्र कि रिपोर्ट ने कहा कि महिला का श्रम पुरुषों कि तुलना में दुगना है|
एजेंसी एफ.एओ के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में पुरुष एक साल में प्रति हेक्टेयर कुल 12-12घंटे काम करता है वहीं इनकी तुलना में महिलाओं का काम उनसे ज्यादा घंटे हो जाता है। यह सभी बाते महिला किसानों कि स्थिति बताने के लिए काफी नहीं है।

बाईलाइन-सोनी यादव

05/09/2017 को प्रकाशित