महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर धरने

Lucknow kshetry picपहले तो राष्ट्रीय अपराध रिकाॅर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार ये सामने आया कि साल 2014 में महिलाओं के खिलाफ सबसे ज़्यादा अपराध उत्तर प्रदेश में हुए थे और फिर बढ़ती महिला असुरक्षा के संदर्भ में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के विवादित बयान के चलते महिला संगठन सड़कों पर उतर आए।

लखनऊ। महिलाओं के साथ हो रहे बलात्कार और सपा अधयक्ष के बयान का विरोध करते हुए कई संस्थाओं ने हजरत गंज की गांधी प्रतिमा के सामने धरना दिया।
रेड ब्रिगेड की उषा विष्वकर्मा ने बताया कि इस तरह के बयान पर अपराधियों का हौंसला बढ़ेगा। 21 अगस्त को दिन में ही तेली बाग की एक लड़की के कपड़े फाड़कर उसका सरेआम वीडियो बनाया गया, लेकिन कोई कुछ नहीं बोला। बलात्कार की घटना को तो अब गिनना मुश्किल हो गया है। पुलिस अपराधियों को पकड़ने की जगह घटना को दबाने और केस वापस लेने के दवाब बनाती है।
पिछड़ा जनसमाज पार्टी की महिला प्रकोष्ट की अध्यक्ष रजि़्ाया बानो ने सवाल उठाया कि प्रदेश में महिला को क्या अब घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए? उन्हें स्कूल छोड़ देना चाहिए? जिस तरह से उनके साथ घटनाएं हो रहीं हैं ये एक सवाल खड़ा कर रही हैं। सौ नंबर पर जब किसी घटना की जानकारी दी जाती है तो पुलिस तब पहुंचती है जब अपराधी भाग जाते हैं। उस पर सपा का ये बयान कि एक लड़की कै साथ चार लड़की बलात्काऱ ही नहीं कर सकते हैं सरकार की महिला विरोधी सोच को दर्शाता है।
वसुन्धरा वेलफेयर की अध्यक्ष लक्ष्मी रस्तोगी ने बताया कि सरकार अगर महिलाओं के साथ हो रहे उतपीड़न के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाएगी तो हम सभी कार्यकता मिल के आंदोलन करेंगे।