महाभारत की कहानियों से लेकर आयुर्वेद में ख़ास जगह, पारिजात पेड़ को करीब से जानिए

जिला बाराबंकी गाँव किन्तूर। पारिजात कै पेड़ बेमिसाल खूबसूरती अउर फूल कै लाजबवाब महक बाराबंकी जिला के किन्टूर गांव, पारिजात के यही पेड़ के ताई मसहूर बाय| सदियों पुराना ई पेड़ यही इलाका कै ऐतिहासिक विरासत आय।
यही पेड़ से जुड़ी कई पौराणिक कथा बाय। माना जाथै कि कृष्ण अपने रानी रुख्मनी के ताई स्वर्ग से पेड़ लइके आये| एक अउर कथा के मुताबिक अर्जुन अपनी माँ कुंती के ताई ई पेड़ लगाये रहिन।
विशेषज्ञ कै कहब बाय कि पेड़ सैकड़ो साल पुराना आय अउर यहि नस्ल कै अब सिर्फ इहै एक पेड़ बचा बाय। मन्नत मांगै हजारन मनई दूर दराज के इलाका से आवाथिन
रामगोपाल दास गाँव किन्टूर जिला बाराबंकी बताइन कि ई पेड़ चौदह रतन मा एक रतन बाय। छह साल हरा भरा अउर छह साल सूखा रहा थै । गंगा दसहरा का यहमा फूल पाती आवाथै।
सुनील कुमार कानपुर बताइन कि पहली बार जब हम हियाँ आयन दर्शन करेन काफी लाभ मिला।
आयुर्वेद मा पारिजात कै कल्पवृक्ष कै फूल अउर पत्ते गठिया, सूखी खांसी, कब्ज पीलिया, मलेरिया अउर बुखार जैसी बिमारी मा रामबाण काम करा थै अब किटूर के यहि पेड़ का नुकशान से बचावै कै कोशिस जारी बाय। जन्नत के यहि पेड़ का सुरक्षित रखै मा प्रशासन अउर कृषि क्षेत्र कै विशेषज्ञ लाग अहैं।

रिपोर्टर—नसरीन

24/08/2017 को प्रकाशित