मन मा लगन तौ मिली मंजिल

gandhi nagar
पान बेचत सावित्री

जिला चित्रकूट, ब्लाक मानिकपुर, मुहल्ला  गांधी नगर। हिंया के सावित्री का मनसवा पान के दुकान खोले रहै। बीस बरस पहिले वा खतम होइगा। तबै सवित्री का पान बेचैं मा लाज आवत रहै, पै अब वा हिम्मत कइके पान के दुकान करत हवै।
हिंया के सावित्री बताइस कि मोर मनसवा दद्न डरिया मा धइके बेंचत रहै। जबै मनसवा खतम होइगा तौ मोहिका पान बेचैं मा लाज आवत रहै अउर पर्दा करत रहौं। अब अपने से इलाहाबाद जात हौं अउर हुंवा से पान लावत हौं। मैं रोजै दुकान-दुकान जाये के पान बेंचत हौं। शादी के सीजन मा एक महीना मा पन्द्रह हजार रूपिया कमा लेत हौं। यहै कमाई से लड़कन बिटियन के शादी कीने हौं अउर घर बनवाये हौं। मेहरिया का कत्तौ हिम्मत न हारे का चाही। काम तौ काम होत हवै काम करै मा कउनौ लाज नहीं आय।
यहिनतान दूसर खबर जिला चित्रकूट, ब्लाक कर्वी, कस्बा भरतकूप, नई बस्ती के हवै। हिंया के दशोदा के उम्र लगभग सोलह बरस के हवै। वा के्रशर मशीन के ट्रक मा गिट्टी भरैं का काम करत हवै। या काम वा एक बरस से करत हवै। यहै से वा बहुतै खुश हवै। आपन खर्चा खुदै चलावत हवै।
दशोदा का कहब हवै कि गरीब परिवार से हौं। बाप महतारी गरीब रहैं ट्रक मा गिट्टी भरत रहै। तबहूं घर का खर्चा नींकतान से नहीं चल पावत रहै। खाये खातिर एक-एक दाना का तरसत रहेन। या कारन अपने से हिम्मत कीनेंव अउर यहै काम मैं भी करै लागेंव। रोज का तीन सौ रूपिया कमा लेत हौं। आज बहुतै खुशी होत हवै कि बिटिया अउर मेहरिया भी ख़ुद कमा के आपन पेट भर सकत हवंै। मोहिका आज अपने मंजिल मिल गे।