मनरेगा से दूर मजदूर

Manrega logoचित्रकूट। गांवों में प्रधानों के कार्यकाल के पांच साल पूरे होने वाले हैं। लेकिन चित्रकूट जिले के पांचों ब्लाकों के सैकड़ों लोगों के जाब कार्ड अब तक नहीं बने हैं। जिनके बने हैं उन्हें भी काम नहीं मिल रहा।
ब्लाक मानिकपुर, गांव कुंई। यहां के कामता, मुन्नालाल राममिलन और रानी का कहना है कि प्रधान विजय सिंह ने हमारा जाबकार्ड तक नहीं बनवाया हैं। जाबकार्ड बनवाने के लिए पांच साल से बराबर कहा है मनरेगा के तहत काम नहीं मिलता इस कारण से परदेस कमाने जाना पड़ता है। प्रधान विजय सिंह कहते है कि आबादी लगभग चार हजार है। मनरेगा के तहत दो सौ लोगों को काम दिया गया है। लेकिन लोग हमेशा प्रधान के खिलाफ ही रहते हैं। लोग इसी तरह बताते हैं तो क्या किया जा सकता है।
मानिकपुर बी.डी.ओ. महाराज प्रताप प्रजापति का कहना है कि लोग ब्लाक में लिखित दं तो जाबकार्ड बनवाया जाएगा और काम भी दिया जाएगा।
ब्लाक कर्वी, गांव भारतपुर। यहां की चुन्नी और कुन्ती बताती हैं कि जाबकार्ड तो बने हैं। लेकिन हम लोगों को प्रधान सावित्री देवी ने मनरेगा के तहत कोई काम नहीं दिया है। इस कारण से काम की तलाश में लोगों को बाहर जाना पड़ता है। अगर मनरेगा के तहत गांव में ही काम मिलता तो इतनी ज्यादा परेशानी न उठानी पड़ती।
प्रधान सावित्री देवी के पति राजू नैन कहते हैं कि आबादी चार हजार है। जाबकार्ड नौ सौ बने हैं। लोग खुद ही मनरेगा के तहत काम नहीं करते हैं। कहते हैं कि मनरेगा में कम मजदूरी मिलती है।
सी.डी.ओ. मुजाहिदुल अहसन का कहना है कि मनरेगा के तहत सरकार काम तो देती है। लेकिन कुछ लोग मनरेगा में काम नहीं करना चाहते है लेकिन जिन गांव की समस्या आई है उन गांव में जांच कराई जाएगी। और प्रधान के खिलाफ कारवाही की जा सकती है।