मनरेगा में नाहीं मिलत काम

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काम करत महिला

सरकार ने मनरेगा योजना शुरु की काहें  से की मजदूरन के काम मिल सके। आउर गावं  के विकास के साथ साथ मजदूर के भी सहारा होय। बनारस में अइसन कई गावं  हव जहां महिला के काम नाहीं मिलत। कई जगह काम कइले पर उनके पुरा मजदूरी भी नाहीं मिलत।
सरकार गरीब खातिर के कई तरह का काम शुरू करवइले हव। पोखरा में मछली पालन, खेत में समतलीकरण। अहिसहीं करके सरकार ने गरीब खातिर के कई तरह के काम शुरू करले हव लेकिन फिर भी गरीब के काम नाहीं मिलत। अभहीं चोलापुर ब्लाक पर कई गावं  के मजदूर धरना देहले रहलन जेमे महिला मजदूर भी मौजूद रहलीन। कटारी, अजगरा, रौनाकला, कौवापुर गावं  के कुछ महिला मजदूर के कहब हव कि सप्ताह दस दिन काम मिलि फिर ओकरे बाद मजदूरी खातिर के महीना भर दउड़े के पड़ी। कउनों भी गावं  में मनरेगा के काम कई लोग के तहत होला। जैसे ब्लाक के बी. डी. ओ. गावं  के सेकेटरी आउर प्रधान। कहीं कहीं गावं  में रोजगार सेवक भी होलन। सरकार के तरफ से त गावं  में नरेगा के काम करवावे के जिम्मेदारी एन लोग के सौंप गएल हव। लेकिन एन लोग गावं  में काम करवावत हयन कि नाहीं या गावं  में कइसे काम होत हव, इ सब के अता पता के रखी। सरकार त खाली योजना शुरू कर देई लेकिन उ ठीक काम करत हवकि नाहीं इ बात के धियान के देई?