मध्यप्रदेश में किसानों पर फायरिंग के बाद हिंसा भड़की, कर्फ्यू लगाया

साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में 1 जून से किसान फ़सलों के उचित मूल्य और क़र्ज़ माफ़ी को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।  जिसके चलते 6 जून को उग्र हुए किसानों पर फायरिंग की गयी।

मध्य प्रदेश के मंदसौर में चल रहे किसान आंदोलन के दौरान हिंसा भड़क उठी। हिंसा पर नियंत्रण के लिए पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में 6 की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गये। स्थिति देखते हुए संवेदनशील इलाक़ों में प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया है।

यही नहीं, हिंसा के बाद मंदसौर, रतलाम और नीमच ज़िले में मोबाइल इंटरनेट पर रोक लगा दी गई है ताकि अफ़वाहों से बचा जा सके। पूरे मंदसौर जिले में धारा 144 लगाई गई है। विरोध कर रहे किसान अपनी फसलों के लिए ज्यादा समर्थन मूल्य समेत 20 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

किसानों की मौत को लेकर सरकार दावा कर रही है कि पुलिस ने फायरिंग की ही नहीं। सूबे के गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने खुद पुलिस फ़ायरिंग से ही इनकार कर दिया है।

मरने वाले किसानों के परिवारों को दिए जाने वाला मुआवज़ा 10 लाख से 10 गुना बढ़ाकर एक करोड़ कर दिया गया है।

इस बीच मामले पर राजनीति तेज़ हो गई है। कांग्रेस ने आज इस मुद्दे पर सूबे में बंद बुलाया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मंदसौर जा सकते हैं।

राष्ट्रीय किसान मज़दूर संघ ने भी बंद बुलाया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बीजेपी के न्यू इंडिया में हक़ मांगने पर हमारे अन्नदाताओं को गोली मिलती है?

वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्वजिय सिंह ने भी शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा है कि ये तथाकथित किसान पुत्र न संघ का सगा है न किसान का सगा है न बीजेपी का सगा है, यह सिर्फ़ स्वयं का सगा है।