मद्रास उच्च न्यायालय के जज ने दी ‘महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी’

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22 जून को मद्रास उच्च न्यायालय के जज एस. वैद्यनाथन कुछ वक़्त चर्चा में आये, जब उन्होंने एक आदमी की ज़मानत देने से इनकार कर दिया. इस आदमी पर एक नाबालिक लड़की के बलात्कार और अपहरण का आरोप लगा था. यही नहीं इसने बलात्कार के बाद लड़की को धमकाया और वॉटस-एप पर उसकी अश्लील तस्वीरें डाल देने को कहा.

इस मुद्दे पर जज ने अपनी विशेष टिप्पणी देते हुए कहा कि लोग, ख़ासकर महिलाएं, जो वॉटस-एप इस्तेमाल करतीं हैं उन्हें सावधान रहना चाहिए. किसी दुर्घटना से बेहतर है कि सुरक्षा के उपाय अपनाए जाएं.

पिछले साल राजस्थान बारमेर, की खाप पंचायत ने कहा था कि लड़कियों को मोबाइल फ़ोन नहीं इस्तेमाल करना चाहिए नहीं तो वह मुसीबत में फंस सकती हैं. ‘किसी हानि को रोकना, उसके इलाज करने से बेहतर होता है’. पंचायत का ऐसा कहना इस सोच को बड़ावा देता है कि यौन उत्पीड़न महिलाओं की गलतीयों के कारण होता है. अक्सर औरतों से कहा जाता है कि उन्हें किस तरह के कपड़े पहनने चाहिये, किस तरह से बैठना और चलना चाहिये, घर जल्दी आना चाहिए आदि.

औरतों पर अपनी जबरन टिप्पणी करने की बजाय जज को कहना चाहिये था कि शुरुआत से ही पुरुषों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाना चाहिये ताकि बलात्कार जैसे अपराध जड़ से खत्म हो सकें.

लेख साभार :  मंदरा विश्वनाथ / द लेडीज फिंगर ( http://theladiesfinger.com/judge-whatsapp/)