मतदाता के लेल तरह-तरह के प्रलोभन

मतदान के तैयारी में सारा पार्टी लागल छथिन। मतदाता के आकर्षित करे के लेल तरह-तरह के प्रलोभन अउर भाषण बाजी चल रहल हई।
लोगों में भी ऐईके चर्चा खुब चल रहल हई। कुछ लोग कहलथिन कि जेकरा वोट लेवे के हई उ पहिले गांव में सुविधा दे। वोट के समय वादा अउर दिलासा देई छथिन लेकिन जितला के बाद कोई केकरो खबर न लेई छई। उहे दोसरा तरफ पिछला चुनाव में भेल नतिजा के लेके लोग में दहशत भी हई। कोई पार्टी कुछ लोग के मोटर साईकिल देलथिन लेकिन हारे के बाद उ छिन लेलथिन। ओईसही अगर ऐई बेर न जितथिन त पार्टी के लोग ट्रांस्फॉमर  लगवयले छथिन उ कहीं हारे के बाद खोल के ले न जाये वईसे इ सब वोट-बटोरे के हथकण्डा सब हई। हर पार्टी दोसर पार्टी के निचा देखावे में लागल छथिन। लेकिन जनता के चिन्ता केकरो हई? अगर हई त ऐतना दिन में जनता के केतना सहयोग कयले छथिन। इ बात भी ध्यान में रख के मतदान करू। केकरो दवाब या लोभ में मतदान न करब। लोकतंत्र के मतलब हई लोग के द्वारा सरकार।जेईमें अपन बात रखे के सब के अधिकार हई लेकिन फैसला हमेशा बहुमत के हिसाब से होई छई।
जहां एक ओर लोग महंगाई के मार झेल रहल छथिन उहे दोसर ओर आकलन हई कि ऐई बेर के चुनाव देश के इतिहास में सबसे महंगा चुनाव होतई। चुनाव के खर्चा में दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरा नम्बर पर भारत हई। जहां एक ओर भुखल जनता रोटी, कपड़ा, मकान ला तरसई छई उहे चुनाव में पानी के तरह पेट्राॅल अउर पता के तरह बैनर में खर्चा कयल जाई छई। ओई देश के भविष्य के की होतई?