मजबूर हवैं किसान भूख हड़ताल करै खातिर

जान जाये के बाद सरकार हमार सुनवाई करी का?

उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के चित्रकूट जिला मा या समय किसान आपन सूख फसल देख के बहुते परेशान हवैं। काहे से कि किसानन का फसल खातिर बरुआ बांध से नहरन मा पानी नहीं छोड़ा जात आय। यहै कारन लगभग एक हजार किसान मिल के 27 दिसम्बर 2017 से धरना प्रदर्शन अउर अमरन अनसन करिन हवैं। किसानन के या समस्या का लईके कउनो अधकारी ध्यान नहीं दिहिन आहीं। नहरन मा पानी न होय से मडइन के सैकरन बिघा फसल बर्बाद होत है।पै अधिकारी चार दिन तक कउनो उनका देखे तक नहीं गें रहैं या कारन कईयो किसानन के तबियत भी ख़राब होइ गे हवै।चित्रकूट जिला के किसानन के या समस्या कउनों नई बात नहीं आय। हिंया तों हर रोज के समस्या बनगे हवै किसान चाहे मरें चाहे धरना प्रदर्शन करै शासन प्रसाशन से कउनो मतलब नहीं आय। सरकार बड़े ताल थोक के कहत हवै कि किसानन का हरतान के सूविधा मिली? पै सरकार सब झूठ बोलत है आजतक परेशान किसानन का कउनो सूविधा सरकार नहीं दिहिस आय।आखिर सरकार किनतान के सूविधा के बात करत हवै। चित्रकूट जिला मा लाखन किसान दरदर के ठोकर खात हवैं।पै सरकार का यहिसे कुछ मतलब नहीं आय। का सरकार बस नाम खातिर सूविधा के बात करत हवै ?का जबै किसानन के जान चली जई तबै सरकार का चिंता होइ का?
अगर किसान फसल ना तैयार करी तो हमरे देश का, का होइ? कहेका तो हमार देश कृषि प्रधान देश हवै पै खेती नाम खातिर हवै।जबै किसानन का सूविधा न मिली तै कसत खेती होइ? मजबूरी मा किसान धरना प्रदर्शन करै का मजबूर होत हवैं। पता नहीं का होइ चित्रकूट के किसानन का कबै तक इनतान भटकत रहि है?