मकसद खोता ‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ कैसे? देखें बांदा, महोबा, ललितपुर की इन घटनाओं में

24 जनवरी राष्टीय बलिका दिवस, इस दिन भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कुर्सी पर बैठी थी। बलिका दिवस मनाने का मकसद लड़कियों को खेल, राजनीति,उधोग जैसे हर क्षेत्र में आगे बढ़ाना है, पर क्या हमारी लड़कियां निडर होकर आगे बढ़ रही हैं?
मई 2017, जिला बांदा का अतर्रा क्षेत्र जहां सोलह साल की लड़की के साथ 25 साल के लड़के ने बलात्कार किया। लड़की का कहना है कि गरीबों के साथ न्याय नहीं होता है क्योंकि हम जैसे गरीबों के लिए सरकार नहीं है।
दिसम्बर 2017, जिला महोबा में छह साल की बच्ची के साथ बलात्कार हुआ। एसपी एन कोलांची ने बताया कि छह साल की लड़की रात बारह बजे घर के बाहर शौच करने गई थी तब यह घटना हुई है। डाक्टरी होने के बाद बलात्कार की रिपोर्ट लिख ली गई है।
सितम्बर 2017, जिला महोबा का अम्बेडकर नगर में एक बच्ची के साथ गैंगरेप, बलात्कार करने के बाद उसे पहाड़ी से फेंका गया था। लड़की के पिता राजकिशोर का कहना है कि हम जैसे गरीब दब जाते है, कोई कारवाही नहीं कर पाते है।
जनवरी 2018 जिला ललितपुर का खितवांस गांव में चौदह साल की लड़की के साथ बलात्कार हुआ, आरोपी उसके ही स्कूल का अध्यापक था। लड़की ने बताया कि मैं बाथरूम करने गई थी तब पीछे से सर आयें और मेरे साथ बलात्कार किया है।
हमारी बेटियां कोख में सुरक्षित है, न कोख से बाहर

रिपोर्टर- खबर लहरिया ब्यूरों 

Published on Jan 24, 2018