मंडी में खड़ी धान की फसल क्यों रुला रही हैं किसानों को? जानें बांदा जिले के इस विडियो से

धान की फसल सरकारी खरीद खातिर मंडी मा आ गे है।
धान के या खरीद 23 नवम्बर से 31 जनवरी 2018 तक चली।
बांदा मा सहकारी क्रय-विक्रय समिति मा धान के फसल ख़रीदे का काम चलत है हेंया के किसानन का धान बेंचे खातिर बहुतै परेशानी उठावें का पड़त है।किसानन का कहब है कि हमें धान बेचें खातिर एक-एक हफ्ता रुके का पड़त है। कउनौ के धान खराब बतावत हैं तौ कउनौ के नम्बर लगावे खातिर रुके का पड़त है। आशीष शुक्ला का कहब हवै कि तीन –चार दिना पाहिले मैं हेंया धान बेचें खातिर आये रहे हौं पै अबै तक मोर धान नहीं खरीदिन आहीं। अमरनाथ बताइस कि मोर धान का काला बता के धान नहीं खरीदत आहीं। धान सरकारी मानक के हिसाब से खरी नहीं उतरत तौ धान नहीं खरीदत आहीं।मैं एक हफ्ता से हेंया पड़ा हौं दुई बोरिया धान जानवर खा गे हैं। प्राइवेट मंडी के मनमानी से बचें खातिर किसान सरकारी मंडी मा आपन धान बेचें चाहत हैं। पै हमार धान नहीं खरीदत आहीं हमार जइसे काला धान रुपिया लइके खरीद लेत हैं तौ हमार काहे नहीं खरीदत आहीं।
केंद्र प्रभारी राजबहादुर का कहब है कि धन जब तक मानक के हिसाब से नहीं होत तौ नहीं ख़रीदा जात आय।सरकारी मानक के हिसाब से धान साफ, सूख, एक जइसे रंग अउर आकार के साथै फफूंद, घुन, बदबू अउर कउनौ नुकसान करे वाली चीज न पड़ी होय का चाही। पन्द्रह सौ पचास रूपिया कुंतल के हिसाब से धन लीन जात है पन्द्रह रुपिया पल्लेदारन का दीन जात है। ख़राब धान किसान प्राइवेट मंडी मा बेंच सकत हैं।
रिपोर्टर-गीता देवी    

Published on Dec 15, 2017