मंच की राम लीला हुई डिजिटल स्टाइल! महोबा में त्यौहार के बदलते रूप

जिला महोबा। कहते हैं पर्दे की जिन्दगी से हकीकत की जिन्दगी अलग होती है। ऐसा ही होता है अब रामलीला दिखाने में। पहले कलाकार मंच पर काम करते थे पर अब तो आधुनिकता के इस दौर में रामलीला कलाकार भी पर्दे पर काम करते दिखते हैं।
गणेश सोनू का कहना है कि अब पर्दे में रामलीला आठ बजे से बारह बजे तक दिखाते हैं।
रास्वरूप ने बताया कि पहले रामलीला के लिए आगरा के कलाकार बुलाये जाते थे। पर्दे में जो रामलीला होता है वह अच्छा लगता है क्यों कि मंच पर नाच गाना बहुत होता था। तुलसा रानी का कहना है कि पर्दे पर रामलीला देखने में अच्छा नहीं लगता है। साहित्य परिषद के अध्यक्ष डाक्टर रमेश  जैदका का कहना कि लोहे का रावण है उसी में कपड़ा  और रद्दी लगा कर सजाया जाता है फिर राम रावण को तीर मारता है।

बाईलाइन-सुनीता प्रजापति

28/09/2017 को प्रकाशित