भारत में सबसे ज्यादा मर रहे बच्चे

(फोटो साभार - इंडियन एक्सप्रेस)
(फोटो साभार – इंडियन एक्सप्रेस)

वाशिंगटन, अमेरिका। द लांसेट जर्नल के मुताबिक निमोनिया, दस्त, पैदा होने पर कम वजन, समय से जल्दी पैदा होना और शुरुआती बीमारियों की वजह से इन बच्चों की मौत होती है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल के मुताबिक अगर मां की देखभाल ठीक से हो तो इनमें से कई बीमारियां नहीं होंगी। मां की देखभाल, दस्त और निमोनिया के सही इलाज और नए वैक्सीनों के जरिए इन बीमारियों को दूर रखा जा सकता है।
2005 में भारत में पांच साल से कम उम्र के दो लाख पैंतिस हजार बच्चों की मौत हुई थी। यह विश्वभर के आंकड़ो का बीस प्रतिशत है। इनमें से बासठ प्रतिशत बच्चे इन आम बीमारियों का शिकार बने थे. रिपोर्ट के लिए जनमत सर्वेक्षण में चैबिस हजार आठ सौ इकतालिस बच्चों की मौत के कारणों को जांचा गया।
उनके परिवारों से सवाल पूछे गए जिससे उनकी मौत के कारणों के सही वजहों का पता लग सकता। सर्वे के मुताबिक एक से लेकर उनसठ महीनों के बच्चों में से लड़कों के मुकाबले छत्तीस प्रतिशत ज्यादा लड़कियों की मौत हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य भारत में दक्षिण भारत के मुकाबले लड़कियों की मौत ज्यादा हुई क्योंकि स्वास्थ्य केंद्रों में लड़कियों से ज्यादा लड़कों को ले जाया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि घर पर ले जाकर वैक्सीन देने वाले मामलों में लड़कियों की मौत कम हुई। इसलिए सुझाव के तौर पर कहा गया है कि नियोमनिया और दस्त जैसी बीमारियों में वैक्सीन सीधे घर पर भेजे जाने चाहिए।

विश्व भर में भारत में सबसे ज्यादा पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत होती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे ज्यादातर उन बीमारियों से मरते हैं जिनका इलाज आसानी से किया जा सकता है।