भारत में खाद्य संरक्षण

साभार: विकिपीडिया

हाल ही में कुछ कृषि उत्पाद जैसे टमाटर, आम और अदरक की कीमतें में गिरवट का कारण अधिक उत्पादन था, जिस कारण से किसानों ने अपने कृषि उत्पाद को खुद ही कष्ट कर दिया। फल और सब्जी जैसे उत्पाद जल्दी खबरा हो जाते हैं। अपर्याप्त भंडारण सुविधाओं और खराब खाद्य संरक्षण के साथ किसानों के लिए सीमित बाजार उत्पाद की कीमत भी नहीं निकल पाते हैं। खाद्य प्रसंस्करण में कच्चे खाद्य उत्पाद स्टोर करने के साथ बाजार में भी बेचे जाते हैं, साथ ही भविष्य में उपयोग के लिए संरक्षित भी किए जाते हैं। 2001 से 02 और 2016 से 17 में अनाज के उत्पादन में 1.7 प्रतिशत वृद्धि हुई। वहीं बागवानी फसलों का उत्पादन 4.8 प्रतिशत तक आगे निकल गया, जो इन सालों में सबसे ज्यादा था। वहीं ये बंपर फसल भंडार गृह और खाद्य संरक्षण की कमी के कारण खराब हो गई।

वहीं 2015 में फलों में 7 से 16 प्रतिशत और अनाज में 5 प्रतिशत की उपज इस ही कारण से नष्ट हुई। इसमें अमरुद और आम जैसे जल्दी खराब होने वाले फलों की मात्रा सबसे ज्यादा थी। फलों और सब्जियों की तुलना में अनाज देर से खराब होता है। लेकिन इन फसल की हानि कटाई, सुखाई, पैकेजिंग, परिवहन और भंडारण के दौरान भी बड़ी मात्र में हो जाती है। वहीं भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर की कमी देश में है। कोल्ड स्टोर में 9.3 प्रतिशत की कमी है, वहीं पैकेजिंग हाउस में 99.6 प्रतिशत, वाहनों में 85.4 प्रतिशत और पकाने वाले भंडार गृह में 91.1 प्रतिशत की कमी देश में देखी गई है। इन हालातों में, अच्छी पैदावार फसलें और खाद्य उत्पाद संरक्षण की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण नष्ट हो रही है।

लेख साभार: पी आर एस