भारत में कुपोषण घटा मगर कई देशों से बहुत पीछे हम

kuposhanनई दिल्ली। भारत में कुपोषण के मामलों में कमी आई है। लेकिन इसके बाद भी ब्राजील के मुकाबले तेरह गुना, चीन के मुकाबले नौ गुना और दक्षिण अफ्रीका के मुकाबले तीन गुना ज्यादा कुपोषण यहां है।
माना जा रहा है कि कुपोषण कम होने का कारण संस्थागत डिलीवरी और विटामिन ए की गोलियों की उपलब्धता है। यूनाइटिड नेशंस चिल्ड्रन्स फंड की रिपोर्ट रैपिड सर्वे आफ चिल्ड्रन 2013-14 के अनुसार भारत में 2005-06 में जहां मानक वजन से नीचे के पांच साल से कम उम्र के बच्चों आंकड़ा साढ़े तैंतालिस प्रतिशत था वहीं अब 2013-14 में यह आंकड़ा साढ़े उन्तिस प्रतिशत रह गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ग्रामीण इलाकों में शहरी इलाकों के मुकाबले कुपोषण के ज्यादा मामले हैं। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों में कुपोषण के मामले ज्यादा पाए गए। अनुसूचित जातियों में जहां साढ़े बयालिस प्रतिशत कुपोषण पाया गया वहीं अनुसूचित जनजातियों में साढ़े तिरालिस प्रतिशत कुपोषण पाया गया। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में इस दरम्यान कोई सुधार नहीं देखा गया जबकि छत्तीसगढ़ में आठ प्रतिशत और मध्य प्रदेश में इक्कीस प्रतिशत सुधार हुआ।