बौद्ध धर्म परिवर्तन कर दलितों का जीवन और शैक्षणिक स्तर हुआ बेहतर 

 

साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

देश में बौद्ध धर्म मानने वालों की संख्या 84 लाख है, जिसमें 87 % लोग धर्म परिवर्तन किए हैं। धर्म परिवर्तन से बौद्ध धर्म अपनाने वालों में अधिक लोग दलित समुदाय के हैं, जो हिंदू धर्म के जातिवाद से बचने के लिए बौद्ध बने। 13 फीसदी बौद्ध आबादी पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तरी हिमालय के इलाकों में रहने वाली पारंपरिक बौद्ध समुदाय की है।  

बौद्ध धर्म अपनाने वाले लोगों को नव-बौद्ध कहा जाता है और ये समुदाय साक्षरता दर, नौकरियों में हिस्सेदारी तथा लिंगानुपात के मामले में आज हिंदू दलित समुदाय से बेहतर है।  

भारत में बौद्ध धर्म मानने वालों का साक्षरता दर 81.29 % है, जो 72.98 % के राष्ट्रीय दर से अधिक है। वहीं हिंदुओं में साक्षरता दर 73.27 % और अनुसूचित जातियों में साक्षरता दर इससे काफी नीचे 66.07 % है।

छत्तीसगढ़ में बौद्ध आबादी में साक्षरता 87.34, महाराष्ट्र में 83.17% और झारखंड में 80.41 % है। धर्म परिवर्तन से बौद्ध अपनाने वालों की संख्या महाराष्ट्र में अधिक है, इसके बाद मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश है।

महाराष्ट्र की कुल आबादी का 5.81% हिस्सा बौद्ध है, जिनकी संख्या 65 लाख के करीब है। प्रख्यात विद्वान एवं हमारे संविधान के रचयिता बी. आर. अंबेडकर महाराष्ट्र के रहने वाले थे और उन्होंने 1956 में महाराष्ट्र में ही 60,000 समर्थकों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया था।

देश में आज भी जातिवाद है। पर धर्म परिवर्तन कराने वालों की संख्या में जरूर गिरावट आई है। उत्तर प्रदेश में बौद्ध समुदाय में साक्षरता 68.59 % है, जो राज्य की कुल साक्षरता (67.68 फीसदी) से अधिक है। साथ ही बौद्ध समुदाय में महिलाओं की साक्षरता दर (74.04 फीसदी) भी काफी अच्छी है।  

 

साभार: इंडियास्पेंड