बेला, गुलकंद, चमेली, खुशबू लीजिये, जानिये कैसे बनता है इत्र

उत्तर प्रदेश का कनौज शहर इत्र नगरी के नाम से पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहां बड़ी संख्या में इत्र बनाने के कारखाने देखे जा सकते हैं। इन कारखानों में गुलाब,बेला, गेंदा, केवडा,चमेली आदि के फूलों से इत्र निकाला जाता है। सबसे बडी बात यह है कि यहाँ मिट्टी से भी इत्र बनाया जाता है।

ऐसी ही एक कारखाने का खबर लहरिया ने दौरा किया। मीना परफ्यूमरी के नाम से बने कारखाने में बरसों से कई तरह के इत्र बनाये जा रहे हैं। इस कारखाने के कर्मचारी आशा राम गुलाब का इत्र बनाने की तैयारी कर रहे थे। वहां बड़े-बड़े तांवे के गुलाब की पंखुडियो से भरे बर्तन (डेग) चुल्हे पर सरपोश से ढके,भट्टियों पर चढ़ेहुए थे।सरपोश में बांस के चोंगे लगे थे जिसे रूई और मिट्टी मिलाकर सील किया गया था और दूसरा चोगा लगभग 70 डिग्री के घुमाव पर गच्ची (हौज) में डाला हुआ था।

कुछ समय बाद कर्मचारी बेस (खास तरह का तेल) डाल हाथो से मल कर खुशबू को भभका में एकत्र कर लेंगे। फ़िर उसे फ़िल्टर कर ऊंट के चमड़े से बने कुप्पे में रख धूप में सुखा कर, स्टोर करके सप्लाई के लिए भेज देंगे।

यहाँ मिट्टी का भी इत्र बनाया जाता है जिसके लिए कुम्हार के आवे में पके मिट्टी के टूटे बर्तन का इस्तेमाल होता है।

कारखाने के मालिक शशांक महरोत्राने बताया कि वह अपने बाबा-परदादाओं के ज़माने से यह कारखाना चला रहे हैं। “हमारे यहाँ जिस तरह के गुलाबों का इत्र बनाया जाता है वह कनौज, उड़ीसा, अलीगढ़ के अलावा और कहीं नहीं मिलता इसलिए यह हमारी खासियत है।”

रिपोर्टर- गीता 

28/04/2017 को प्रकाशित