बेदर्दी से वो दगा दे चले – सुनिए ललितपुर की गायिकाओं के सुर

जिला ललितपुर, गांव महरौनी कहते है कला जन्म से ही मिलती है लोग मेहनत करके कला को और तराशतें हैं।ऐसा ही कर रही है विमला परिहार और उसकी दो बेटियां मनीषा और अनीता। इन लोगों ने अपने गायकी के शौक को अपना कैरियर बनाया है। अपनी धरोहर लोकगीत को नई पहचान दे रही हैं।
विमला परिहार का कहना है कि पहले से  थोड़ा बहुत गाना जानतें थे।फिर बेटियों के साथ मुहल्ले में गाते थे।अब तो हम स्टेज पर भी गाते हैं।
अनीता और मनीषा ने बताया कि हमारी पहली गुरु हमारी माँ है, फिर हमने छुटकू लाल प्रजापति से गायकी सीखी है वही हमारे गुरु हैं। हम पढ़ाई भी करते हैं और गाते भी हैं। नौकरी नहीं करना चाहते क्यों कि गायकी में  ही अपना कैरियर बनाया है। हम स्टेज में लोकगीत भजन सब गाते हैं।

बाईलाइन-राजकुमारी

Published on Sept 8, 2017