बेटे के लिए न्याय मांगती और दलितों की लड़ाई लड़ती “राधिका वेमुला”

साभार: लेडीज़ फ़िंगर

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोधार्थी रोहित वेमुला ने विश्वविदयालय प्रशासन के जातीय भेदभाव के चलते 17 जनवरी 2016 को आत्महत्या कर ली थी। एक साल बीत जाने के बाद रोहित को अभी तक न्याय नहीं मिला है। रोहित की आत्महत्या के बाद उनकी मां राधिका वेमुला रोहित को न्याय दिलवाने के लिए संघर्षरत हैं।
वह कहती हैं, मेरे बिना रोहित का कि आन्दोलन पूरा नहीं होता, हर धरने में मीडिया और चैनल वाले मुझे ढूढ़ते हैं। सभी मुझसे बात करते हैं। मैंने अपने बेटे को खो दिया है और यही सभी पूछते हैं, कि कैसा लगता है? यही कारण है कि मैं अपने स्वास्थ्य का ख्याल रख रही हूँ, जो पिछले दिनों से नाजुक चल रही थी। मैं नाराज़ हूँ, बहुत परेशान हूँ…मेरा बेटा अब नहीं रहा…मैं उसके लिए लडूंगी।
इसी बीच, सरकार द्वारा मशीनरी इस्तेमाल कर यह साब‌ित क‌िया गया क‌ि रोहित वेमुला दल‌ित नहीं थे और उनकी मां ने इस बारे में झूठ बोला है। राध‌िका वेमुला को केंद्र सरकार के इशारे पर लगातार अभद्रता, अपमान और लांछन का शिकार बनाया जा रहा है।
10 मार्च 2017 को सावित्रीबाई फुले को याद करते हुए नागपुर में एक कार्यक्रम हुआ। जिसमें राधिका भी शामिल हुई और उन्होंने बताया कि वह जल्द ही राधिका वेमुला रोहित को न्याय दिलाने के लिए तेलंगाना सहित पूरे आंध्रा में रथ यात्रा का नेतृत्व करेंगी। उनकी रथ यात्रा एक महीने तक चलेगी।
राधिका वेमुला ने कहा, “14 मार्च से मैं अपने बेटे राजा के साथ ‘दलित स्वाभिमान रथ यात्रा’ शुरू करुंगी, यह रथ यात्रा तेलंगाना सहित पूरे आंध्रा में एक महीने तक जारी रहेगी, इस रथ यात्रा के दौरान दोनों राज्यों में रहने वाले दलित बाहुल्य इलाकों का दौरा किया जाएगा, 14 अप्रैल को बाबासाहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर रथ यात्रा का समापन होगा।”
उन्होंने कहा,”हमारी मांग है, हैदराबाद विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर पोदिले अप्पाराव को हटाया जाए, और उनके खिलाफ एससी/एसटी अत्याचार एक्ट के तहत मुकदमा चलाए जाए और विश्वविद्यालय परिसरों में दलित छात्रों के साथ होने वाले जातीय भेदभाव को रोकने के लिए रोहित एक्ट बनाया जाए।”