बीमारी या परीक्षा, ठण्ड या बरसात, घर या बाहर – सब जगह चलती है चाय

चाय आदत आय की शौक? या सोंचे का सब कोउ मजबूर हवै। चित्रकूट जिला के कर्वी ब्लाक के मड़ई तौ स्वस्थ रहै खातिर नीबू वाली चाय पियत हवै। पश्चिम बंगाल से आये साधव मंडल अउर अजीत मंडल नीबू वाली चाय बना के बेंचत हवै
साधव मंडल का कहब हवै कि हम कर्वी मा घूम घूम के चाय बेंचित हवै। चित्रकूट मा दर्शन करै आये हन तौ चाय बेंचे का काम करै लागे हन। पन्द्रह साल से हम चाय बनावैं का काम करत आहीं। उड़ीसा, लखनऊ के बाद अब हिंया चाय बेंचित हवै।
अजीत मंडल का कहब हवै कि हुंवा रुपिया कमात रहेन तौ खर्चा होइ जात रहै यहै कारन कर्वी मा काम करित हवै जेहिसे रुपिया इकठ्ठा कइके आपन घर लइ जा सकी। चाय बेंचे मा एक दिन मा साढ़े  तीन सौ के बचत होत हवै। बब्लू राजवार बताइस कि मैं पहिली दरकी नीबू  वाली चाय पिए हौं चाय पिए मा नींक लागत हवै। ओमप्रकाश बताइस कि नीबू वाली चाय शरीर का फायदा करत हवै अब तौ या चाय के आदत पड़ गे हवै। रामखिलावन बताइस कि पन्द्रह दिना से नीबू वाली चाय पियत हौं यहिसे गैस के बीमारी अउर गला के खरखराहट ठीक होइ गे हवै।
कृषि विभाग के विषय वस्तु विशेषज्ञ संदीप कुमार सिंह कहब हवै नीबू वाली चाय मा नीबू डाले से बिटामिन सी मिलत हवै या हर्बल चाय नुकशान नहीं करत आय।काहे से आज कल का दूध बहुतै ख़राब आवत हवै।
रिपोर्टर-नाजनी रिजवी

Published on Dec 8, 2017