बीज नहीं तौ बेड़ कहां से होई तैयार

नहीं मिलत बीज
नहीं मिलत बीज

धान का बेड़ तैयार करैं का समय निकरा जात है, पै किसानन का धान का बीज नहीं मिलत आय। यहिसे किसान रोज सोसाइटी के चक्कर लगावैं का मजबूर है। एक कइत सरकार अपने आमदनी खातिर एक सोसाइटी मा पचासन गांव के किसानन का सदस्य बनावत है। दूसर कइत छोटे किसानन साथै बीज दें मा भेद-भाव कीन जात है। अगर किसानन के बीज न मिलैं के समस्यन का देखा जाय तौ सरकार के बीज वितरण के अव्यवस्था साफ नजर आवत है। सवाल या है कि शासन प्रशासन किसानन से आपन सींच बांकी ले मा तौ एकौ साल नहीं चूकत आय। फेर वा खाद बीज के समय का काहे ध्यान नहीं देत। बड़े-बडे कास्तकारन का तुरतै बीज दई दीन जात है, पै छोट किसान मारे जात है। उनका सोसाइटी के दसन चक्कर लगावैं का परत है फेर भी बीज नहीं मिलत आय। अगर किसानन का समय से धान का बीज न मिली अउर बेड ना तैयार होई तौ धान के पैदावार कहां से होई। आखिर प्रशासन के इनतान के सुविधा दीने का होत है। यहिसे नींक या है कि किसान प्राइवेट दुकानन से बीज खरीद लें। जेहिसे धान का बेड़ समय से तैयार होई सकै। अगर शासन प्रशासन किसानन के इं समस्यन मा नींक से निगरानी राखैं लागै तौ किसान मड़ई का इं समस्यन से छुटकारा मिल सकत है, पै शासन प्रशासन का आपन काम के समय किसान मड़इन का लालच दें आवत है। यहिके बाद पलट के नहीं देखत,  पै अगर सच्चाई दिख जाय, तौ सरकार जेतनी सुविधा किसानन का देत है। वहिसे ज्यादा किसानन से ही निकार लेत है।