बिना मानदेय कैसे चले काम

फैजाबाद, अम्बेडकर नगर ही नाय पूरे उत्तर-प्रदेष मा वेतन के ताई धरना प्रदर्षन हुआ कराथै। चाहे वेतन बढ़ावै का लइके हुवय या फिर वेतन न मिलै कै कारण। प्रायः देखा जाथै कि काम तौ मनई हर रोज कराथिन लकिन मानदेय साल भर के बादौ नाय मिलत।
सफाई कर्मचारी अउर रसोइया कै छह महीना से मानदेय नाय आवत बाय। मनई काम कराथै पैसा कमाय के ताई जेसे उनके परिवार कै खर्च पूरा होय सकै। अउर आवष्यकता कै पूर्ति हुवय। अउर कउनौ काम मा रूकावट न आवै। लकिन काम के बाद दाम न मिलै से ई सपना अधूरा रहि जाथै। एक तरफ सफाई कर्मी का आठ महीना से वेतन नाय मिलत बाय। जेसे कउनौ खर्च नाय चलत बाय। तौ वहीं दुसरी तरफ रसोइयन का मानदेय ना मिलै से काफी परेषानी हुवत बाय। एक हजार मिलाथै उहौ छह महीना से नाय आय। स्कूल मा खाना बनावै के पीछे कउनौ काम नाय होय पावत। अगर हर महीना मानदेय मिलै तौ उनहूं सबकै गेदहरै अच्छे स्कूल मा पढि़ सकै।
अगर एक दिन काम पै न जाए तौ कारण पूछा जाथै कि काहे नाय आया? बच्चै भूखे पेट पढ़ाई कैसे करिहै? लकिन काम करै वाले से काहे नाय पूछा जात कि मानदेय मिला कि नाय? षासन प्रषासन ई काहे ध्यान नाय दियत कि अगर मनईन का मानदेय न मिले तौ कवन मेर खर्चा चले। अपने घर के गेदहरन का कैसे पढ़ावै-लिखावै? हर महीना वेतन मिलब बहुत जरूरी बाय न कि छह महीना बाद? प्रषासन से आष्वासन मिला बाय कि नवम्बर के लास्ट तक मानदेय भेजा जाये।