बाबाओं का प्रभाव और सच

साभार: फ्लिकर क्रिएटिव कॉमन्स

धर्म को मानना और धार्मिक होना किसी व्यक्ति की पसंद है। लेकिन इसमें खराबी तब आ जाती हैं, जब ये धर्म के ठेकेदार खुद को चमत्कारी कहने लगते हैं और लोग भी इनके करिश्माई व्यक्तित्व से प्रभावित होकर इन्हें भगवान की तरह पूजने लगते हैं। राम रहीम, आसाराम, नारायण साई, रामपाल और स्वामी नित्यानंद ऐसे ही नाम हैं, जो एक समय भगवान की तरह पूजते थे, पर आज दुनिया के सामने उनकी दूसरी ही सचाई है।
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ऊपर दिए नाम बड़े बाबाओं के हैं, लेकिन हमारे गांवों में भी छोटे-मोटे ढोंगी बाबाओं की कमी नहीं है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में निःसंतान महिलाओं को पुत्र प्रप्ति करके के नाम पर बाबा राम शंकर तिवारी महिलाओं के साथ बलात्कार कर रहा था। सचाई सामने आई तो बाबा को 12 मई 2016 में गिरफ्तार किया गया। वहीं एक घटना बाराबंकी के हैदरगढ़ में हुई, जब लोगों को बीमारियों से मुक्त करने के नाम पर सत्यनाम नाम के बाबा ने एक महिला के साथ सम्बन्ध बनाएं। जब महिला गर्भवती हो गई तो बात खुल गई। महिला का आरोप था कि सत्यनाम बाबा ने उसे प्रसाद में कुछ खिलाकर उसे बेहोश कर दिया। इसके बाद जब उसे होश आया तो उसके साथ बाबा गलत हरकत कर चुका थी। हालांकि सत्यनाम को पुलिस ने जेल में भेज दिया था। किन्तु उस विश्वास का क्या जो इन बाबाओं के द्वारा टूटता है। 100 महिलाओं से पुत्र प्राप्तिके नाम पर बलात्कार करने वाला ढोंगी बाबा हुआ गिरफ्तार
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इस तरह के बाबाओं का मुख्य शिकार महिलाएं ही होती हैं, क्योंकि बहुत से सामाजिक दवाब जैसे पुत्र प्राप्ति, परिवार की खुशहाली और महिला का धार्मिक होने वाले कारण महिलाओं को इन बाबाओं से आसानी जोड़ देता है। मऊ के पास के मटियारा गांव में एक स्थान पर हजारों की मात्रा में लोग एक बाबा के पास आते हैं। बाबा जादू टोने का तोड़ करता है। इसके लिए बाबा लोगों को शर्बत पिलाता है, जिसे लोगों को उल्टियां होती है। फिर बाबा उन उल्टियों में से हल्दी रंगे चावल, सुपारी निकालता है और उन्हें लोगों के दुख बीमारी की वजह बताता है। ऐसे ही एक बाबा चित्रकूट के रेहुटीया गांव में कंकाल और खोपड़ी के साथ भूत को भागने का दवा कर रहा है। इन दोनों ही जगहों पर हजारों की मात्रा में लोग दुख से मुक्ति के लिए आते हैं।
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वहीं अप्रैल के महीने में चित्रकूट के बरगढ़ क्षेत्र में कुतुबुद्दीन नाम के अरबी पढ़ाने वाले बाबा पर यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया। बाबा अरबी पढ़ने लाने वाली बच्चियों के साथ अष्लील बातें और छेड़खानी करता था। वह बच्चियों को ये बात नहीं बताने के लिए कुरान की कसम खिला देता था।
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गांवों में इन बाबाओं को मानने का एक कारण बेकार स्वास्थ्य सेवाओं का टोटा भी हैं, जिसके चलते लोग अपनी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए इनकी गिरफ्त में फंस जाते हैं। बबाओं के भक्त आम और देहती जनता ही नहीं हैं बल्कि कुछ बड़े नाम भी हैं, जो बाबाओं को मानते थे। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा के योग गुरु धीरेंद्र ब्रहमचारी का नाम तो सबने सुना ही होगा। धीरेंद्र ब्रहमचारी इंदिरा गांधी के बहुत नजदीकी थे और इंदिरा के बहुत से फैसलों में संजय गांधी के बाद इसका भी प्रभाव होता था। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के भी अध्यात्मिक गुरु तांत्रिक चंद्रास्वामी थे। इन बाबाओं और स्वामियों के मोह से जब इतने बड़े नाम नहीं बच पाये तो आम लोगों का तो कहना ही क्या।
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सभी बाबा ये दिखाने में तो सफल होते ही हैं कि उनके पास एक ऐसी बाबाजी की बुटी है, जो संसार के सब दुखों से आपको मुक्ति दिला देगी। इस चमत्कारी बुटी के नाम पर ही आज भी बहुत से बाबाओं के व्यापार चल रहे हैं, जहां अमीर भक्तों के पैसे और गरीब भक्त की भक्ति से ये लोग फल-फुल रहे हैं।