आवास दिख रहे तैयार, लेकिन उसमे पात्रों के लिए जगह नहीं, ये कैसी योजना पूर्ती है, बांदा जिले के नरैनी कसबे में

जिला बांदा, ब्लाक नरैनी, कस्बा नरैनी 2008 अउर 2009 मा हेंया कांशीराम आवास बनायें  गें रहैं।
जेहिमा दुइ करोड़ नौ लाख अटठासी हजार के लागत लाग रहै।पै अबै तक इं आवास कउनौ पात्र मड़इन का नहीं दीन गें आहीं। मड़इन का कहब है कि आवास खातिर रुपिया मांगत हैं।
डूडा विभाग अधिकारी संजीव सिन्हा का कहब है कि सरकार कइत से नियम बनाव गा है कि लाभार्ती का दस प्रतिशत रुपिया आवास खातिर दे का पड़ी। पै कउनौ मड़ई रुपिया नहीं देत आहीं।यहै कारन सरकार दस प्रतिशत माफ कहिस है कि आवास का कुछ भाग बिना बनावै छोड़ दीन जई।
रूपा का कहब है कि जबै आवास के जांच में रहै तौ कहत रहै कि तुन्हें आवास मिली पै अब रुपिया मांगत है मजदूरी कइ के आपन पेट भरित है। बच्चन का खवावै का नहीं आय तौ आवास खातिर कहां से रुपिया देबै।
अब्दुल रज्जाक का कहब है कि मैं काम नहीं कइ पावत आहूं बोर लड़का कइके खर्चा चलावत है आवास खातिर रुपिया मांगत है हमरे लगे रुपिया होत तौ हम आपन घर खुद बना लेइत।
सरकार गरीबन खातिर योजना तौ बना देत है पै इं योजना मा भी गरीबन से रुपिया मांगा जायें तौ का फायदा इनतान के योजना से।

बाईलाइन-गीता

06/10/2017 को प्रकाशित