बाँदा शहर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी – मास्टर रामनाथ ‘विशारद’

जिला बांद, शहर बांदा पन्द्रह अगस्त का दिन अउतै लोगन का रामनाथ विशारद के याद आवत है। उनमा से उनके लड़का दयाराम गुप्त भी है। दयाराम गुप्ता बहुतै गर्व से कहिन कि मोर बाप स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहैं। यहिसे मोहिका गर्व है कि मैं एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का लड़का हौं।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामनाथ के लड़का दयाराम का कहब है कि बाप देश के आज़ादी खातिर लड़ाई करिस रहै। यहिके साथै उनका लेखन के काम मा भी रूचि रहै। उंई आजादी के लड़ाई लड़ै से पहिले हितकारी नाम के किताब निकारी रहै। मोर बाप का सामाजिक काम करै का भी शौक रहै। या कारन से उंई एक नीक वैद्य भी रहैं। वैद्य होय के कारन लोगन के सेंत मा इलाज करिन रहैं। यहिसे उनका बहुतै लम्बा सफर रहै। उंई अपने जीवन मा बहुतै संघर्ष करिन हैं। दयाराम गुप्त या भी कहिस कि अपने बाप के बारे मा यहिसे ज्यादा अउर नहीं बता सकत हौं। मोर जन्म 1938 मा भा रहै। यतना जरुर पता है कि मोर बाप बंादा जिला के केन नदी के किनारे दरिया घाट मा रहत रहैं। उंई असहयोग आन्दोलन मा भाग लिहिन। यहिमा उनका जेल होइगे। येत्ता सब करै के बाद भी बाप मोरा पढ़ाई मा भी ध्यान दिहिस। यहै कारन है कि मैं जज रहि चुका हूं। मोर नौकरी कानपुर से शुरु भे रहै अउर 1998 मा रिटायर होइगे हौं। मोहिका आज भी अपने बाप के याद आवत है कि मोर बाप बहुतै महान रहै। मैं बहुतै खुश नसीब हौं। स्वतंत्रता दिवस हमार सब के आजादी का दिन है। या आज़ादी का दिन हमारे देश के खातिर शहीद होय वाले लोगन के याद देवावत है। आज भी या गाना सुन के आंखी मा आंसू भर आवत है एे मेरे वतन के लोगो जरा याद करो कुर्बानी।

रिपोर्टर- मीरा देवी 

 

09/08/2016 को प्रकाशित