बाँदा शहर के दो किन्नर एक झलक इनकी ज़िन्दगी की

जिला बांदा, मोहल्ला अलीगंज किन्नर आपन जिन्दगी गा बजा के जिये खातिर मजबूर हैं काहे से सरकार कइत से किन्नर खातिर कउनौ काम नहीं दीन गा आय। यहै खातिर किन्नर इनतान के जिन्दगी जिये का मजबूर हैं।
कमला आपन जिन्दगी के बारे मा बतावत है कि मोर उमर 65 साल है मैं ग्वालियर के रहैं वाली आहूं। बचपन मा बाप महतारी मर गें रहें यहै कारन हमें कउनौ पढ़ावा लिखावा नहीं आय। नाच गा के आपन पेट पालित हन।
सरकार कइत से हमें न पेंशन मिलत आय न कुछौ सुविधा आय। पीला राशन कार्ड बना है जेहिमा पांच किलो अनाज बस मिलत है। येत्ते मा एक महीना मड़ई कसत खा सकत हैं।
किन्नर का गुरु शांति बताइस कि मड़ई मोहिका कोदउवा भी कहत है मोर उमर 90 साल है। 22 साल के उमर मा चित्रकूट जिला से मैं हेंया आई रहि हौं। गुरुद्वारा मा गुरु के मउत के बाद गुरु बन गइंव। हेंया ताजिया रखे जात हैं। हेंया मड़ई मन्नत मांगे आवत हैं। अउर किन्नर से आशीर्वाद लेत हैं।

रिपोर्टर- मीरा देवी

18/10/2016 को प्रकाशित