बाँदा में मनरेगा मज़दूरी पर पैसे नहीं

जिला बांदा, ब्लॉक नरैनी, 9 दिसम्बर 2016। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी योजना (मनरेगा) के तहत नरैनी के नौगवां गांव में चार लाख रुपये की मजदूरी मजदूरों को नहीं दी गई हैं। 100 मजदूरों को मई और जून के महीने में मनरेगा के तहत काम तो कराया गया पर उन्हें मजदूरी नहीं दी गई। अब छह महीने से मजदूरी का इंतेजार कर रहे ये 100 मजदूर कभी गांव के प्रधान, रोजगार सेवक, ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के पास जाकर अपनी मजदूरी मांग रहे हैं पर उन्हें हर जगह से राज्य सरकार से पैसे नहीं मिलने की बात बोलकर लौटा दिया जा रहा है।

मनरेगा में मई जून महीने में 10 हजार रुपये का काम कर चुकी 40 वर्षीय चुन्नी देवी कभी-कभी काम मिलने की परेशानी से बहुत दुखी थी, पर अब तो वह जो काम कर चुकी हैं, उसके पैसे के लिए भी बेचारी तरस रही है।

गांवों में सौ दिन का रोजगार देने के लिए बनाई गई, इस योजना को गांव में चलाने के बावजूद भी नौगवां के युवा पंजाब, दिल्ली जैसे जगहों पर रोजगार के लिए चले जाते हैं। इस ही बात को बताते हुए श्रीपाल कहते हैं, “मैंने दो महीने काम किया था और मेरी पूरी 15 हजार की मजदूरी है। पर मुझे सिर्फ 2 हजार रुपये ही अभी तक दिए गए हैं।” वह परेशान हैं क्योंकि उनका बेटा पैसे कमाने के लिए  पंजाब चला गया है और वह जैसे-तैसे काम करके अपना घर चला रहे हैं।

चुन्नू भी मजदूरी नहीं मिलने से परेशान हैं। वह कहते हैं, “रोजगार की कमी और मजदूरी मिलने में देरी जैसी परेशानियों के कारण ही लोग पंजाब राज्य में रोजगार के लिए चले जाते हैं।”

मनरेगा में रोजगार सेवक के रुप में काम करने वाले धीरज शर्मा अभी मनरेगा के सभी काम बन्द होने की बात कहते हैं और जिसकी वजह वह भी मजदूरी का पैसा  नहीं आना बता रहे हैं।

नौगवां की प्रधान  गुड़िया देवी भी 4 लाख रुपये की मजदूरी नहीं मिलने की बात कहकर बताती हैं, “अभी मनरेगा में काम तो बहुत हैं, पर मजदूर बिन पैसे के काम करने के लिए राजी नहीं हैं। उन्होंने मजदूरी के लिए बीडीओ से लेकर  सीडीओ तक से बात कर ली है, पर हर जगह पैसा राज्य सरकार से नहीं आने की बात कही जा रही है।”

रिपोर्टर- गीता

07/12/2016 को प्रकाशित