बाँदा के मुहर्रम में ताजिया और मातम

जिला बांदा, मोहल्ला डिग्गी चौराहा 12 अक्टूबर का सगले ताजिया निकाली गई हवै। मुहर्रम के चाँद निकले से पहिले मुहर्रम की तैयारी शुरू होई जात है। इमामबाडा सजावा जात है सवा दुई महीना तक या त्यौहार मनावत है।
बांदा जिला मां रहै वाली शीबा अउर तलत जहरा बतावत हवै कि ताजिया के कहानी 14 सौ साल पुरान है। जबै यजीद नाम का राजा इमाम हुसैन के काफिला का परेशान करत रहै। काफिला मा र है वाले बच्चन अउर मेंहरियन का पानी खातिर तक तरसावत रहै। यहै कारन इमाम हुसैन समेत बहत्तर मड़ई आपन कुर्बानी दीन रहै। जेहमा गोदी मा खेलत बच्चा तक शामिल रहै। जउन मेहरिया जिन्दा बची रहै उनके साथै बहुतै मारपीट कीन अउर कैद खाना मा बंद कई दीन रहै। जबै यजोद का एक साल बाद आपन गलती का पछतावा हुआ, तौ मेहरिया अउर बच्चन का कैद खाना से आजाद करिस रहै। कुर्बानी का इमाम हुसैन का लड़का आबिद अले हिस्साम बीमारी के कारन जिन्दा बचा रहै। यहै कारन सवा दुई महीना गम के मनाय जात है। जह्से घर मा कउनो के मउत होइगै होय इन्तान मड़ई या महीना मनावत है । मेहरिया कउनो सिंगार नही करत आही, न रंगीन कपड़ा पहिनत आही। काले रंग के कपड़ा पहिनत है। पकवान के कउनौ चीज,पूड़ी, सेवई, मछली कुछौ नही बनत आय। पूरे सवा दुई महीना मड़ई गम मनावत है। खुशी मनावे का कउनौ काम नही मनाई जात है न या महीना मा कउनो शादी होत है।

रिपोर्टर- गीता देवी और नाजनी रिजवी 

12/10/2016 को प्रकाशित