बाँदा के तिंदवारी ब्लॉक के तेरही माफी गाँव में हुआ ज़ोरदार दंगल

बाँदा जिला के ब्लाक तिंदवारी गांव तेरही माफ़ी में पिछले सौ वर्षों से दंगल का खेल खेला जाता है। इस बार मौका था कृष्ण जन्मोत्सव का। जिसके लिए पूरा गांव दंगल देखने के लिए जमा हुआ था। इस दंगल में जिले के एक-से-एक पहलवान शामिल हुए।
पहलवानी एक ऐसी दीवानगी का खेल है, जिसमें अपने हर शौक को मार कर अपने बदन की हिफाज़त अच्छी खुराक के साथ करनी पड़ती है। दशकों पहले जो अखाड़े चल रहे थे उनमें पहलवानों को अखाड़े की ओर से अच्छी खुराक दी जाती थी।
यहां तक की गांव के मुखिया और सरपंच भी इन अखाड़ों की मदद किया करते थे। आज स्थिति ये है कि दंगल के इस मैदान में पहलवान कम दिखाई दे रहे हैं। अखाड़े सरकार की बेरुखी से बंदी की कगार पर है। पूरे ज़िले में मात्र तीन से चार अखाड़े ही चल रहे हैं। प्रदेश में इनकी संख्या महज़ एक दर्जन रह गई है।
खिलाड़ियों का कहना है ‘कुश्ती के दंगल के ज़रिये हमें सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वहीं कितने पहलावनों को उस्तादी देने वाले कोच का कहना है कि अगर सरकार कुश्ती पर ध्यान दे तो हम एक नहीं लाखों पहलवान दंगल से पैदा कर सकते हैं। जो ओलंपिक भी लाएंगे, पर हमें इन पहलवानों को मिट्टी पर ही सिखाना पड़ रहा है। अखाड़े में हम अपने स्तर से ही सुविधा दे पाते हैं। राज्य सरकार और खेल मंत्रालय की ओर से कोई सहयोग नहीं जिससे आज हम कुश्ती में पिछड़ रहे हैं।

 

15/09/2016 को प्रकाशित

अब लीजिये दंगल का मज़ा
बाँदा के तिंदवारी ब्लॉक के तेरही माफी गाँव में हुआ ज़ोरदार दंगल