बर्गर खाएं या खाएं फ्राइड राइस, महोबा की सरस्वती के फ़ास्ट फ़ूड पॉइंट में मिलता है सब कुछ

जिला महोबा, शहर महोबा आपने बड़े बड़े आदमी और महिला कारोबार देखे हुए जिनको अपनों खुद को बहुत बडो कारोबार होत। और बे अपने कारोबार की बजे से अपनों नाम भी कमा लेत। एसी ही एक महिला सरस्वती अपनी मेहनत और लगन से फास्टफूड रेस्टोरेंट मालकिन से आज आपको मिला रए।जिला महोबा, शहर महोबा आपने बड़े बड़े आदमी और महिला कारोबार देखे हुए जिनको अपनों खुद को बहुत बडो कारोबार होत। और बे अपने कारोबार की बजे से अपनों नाम भी कमा लेत। एसी ही एक महिला सरस्वती अपनी मेहनत और लगन से फास्टफूड रेस्टोरेंट मालकिन से आज आपको मिला रए। सरस्वती की शादी उनके कॉलेज के दिनन में हो गयी ती सरस्वती के पति मजदूरी करके घर चलात ते। लेकिन सरस्वती को पति को मजदूरी कर बो पसंद नइ हतो। जा से दोई जने ने मिल के फैसला करो के बे खुद अपनों छोटो सो रोजगार शुरू कर हे। सरसवती के पति  महेंद्र ने बर्गर को ठेला दो साल तक लगाओ बाके बाद उन ने छोटी सी फ़ास्ट फ़ूड की दुकान खोली। उतेइ से उन्हें एसी फायदा भई के सरस्वती ने अपनों खुद को घर बनबा लओ और रेस्टोरेंट भी खोलो। बाजार से सामान लेयाबे को काम और काउंटर पे बैठबे को काम अब सरस्वती खूब अच्छे से कर लेती। सरस्वती को शुरू में बैठ बे में अजीब लगत तो और आदमियन से बात करबे में डर भी लगत तो अब सब करन लगी। सरस्वती के रेस्टोरेंट पे आके सब खुश होत और सरस्वती आदमियन के मन को फास्टफूड परोसती हे। सरस्वती ने बताई के रेस्टोरेंट को खुले तो अबे दो साल भये लेकिन जो काम हम सोलह साल से कर रए। पहले छोटे स्तर से चलात ते हम घर से बना के देत ते और हमाय पति बेचत ते फूटपाथ पे। पहले केवल बर्गर बनत तो। हमे अपने घर से पूरी आजादी हती कोऊ नइ रोकत तो न पति न सास ससुर। टेस्ट अपनों देने चाहिए जो ग्राहक को पसंद होबे। मोनिका और अमृत ग्राहक ने बताई के जब मन होत तब आत और अपने परिवार वालिन के संगे भी आत। हमे चाउमीन और फ़्राई चावल अच्छे लगत। बैसे तो सब अच्छो लगत लेकिन हमे जे ज्यादा पसंद हे।

रिपोर्टर- सुनीता प्रजापति 

21/06/2017 को प्रकाशित