बनारस और इलाहाबाद में होता है सबसे ज्यादा वायु प्रदुषण

14479610_1186806484709465_9047320725459638433_nदेश के दो बड़े धार्मिकनगरों बनारस और इलाहाबाद में प्रदूषण सारी हदों को पार कर चुका है। अगस्त माह के 90 प्रतिशत दिनों में बनारस और संगम नगरी इलाहाबाद में प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा स्वीकृत स्तर को भी पार कर गया।

12 शहरों में लगाए गए एयर मानिटरिंग स्टेशनों से मिली रिपोर्ट के आधार पर पता चलता है कि पिछले माह इलाहाबाद, बनारस में सूक्ष्म कणों (जिन्हें पीएम 2.5 भी कहते हैं) का प्रतिशत अचानक भयावह स्तर पर पहुँच गया था ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि हवा में पीएम 2.5 की बढ़ी हुई मात्रा मृत्युदर को तात्कालिक तौर पर बढा सकती है।

इन दोनों शहरों में अचानक खराब हुई इस स्थिति की वजह वाहनों से होने वाला प्रदूषण था जो बाढ़ की वजह से बेहद ज्यादा बढ़ गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर किसी शहर में पीएम 2.5 की मात्रा 24 घंटे के बाद भी बढ़ने के संकेत मिलते हैं तो उस पर तात्कालिक तौर पर कारवाई की जानी चाहिए। जबकि बनारस में यह बढ़ी हुई मात्रा 28 निगरानी दिवसों में से 27 दिवसों में बढ़ी हुई ही आई है।

गौरतलब है कि अस्थमा और ह्रदय रोगों में पीएम 2.5 की बढ़ी हुई मात्रा खतरनाक साबित हो सकती है। रिपोर्ट बताती है कि शुक्रवार बनारस के लिए और बुधवार इलाहाबाद के लिए कम प्रदूषण वाला दिन होता है। इन दोनों शहरों में प्रदूषण की सबसे कम मात्रा 2 बजे से 4 बजे के बीच होती है ,बनारस में बाहर निकलने के लिए सबसे सही समय दोपहर के 3 बजे है।

बनारस शहर में पीएम 2.5 की मात्रा अगस्त माह के 26 दिनों में 30 क्यूबिक मीटर से ज्यादा पाई गई ,भारत सरकार 30 से 60 के बीच स्तर को सामान्य मानती है, जबकि विश्व स्वास्थ्य  संगठन मंत्र है कि 37.5 के स्तर पर मृत्यु डर 1.2 फीसदी बढ़ जाती है जबकि बनारस में अगस्त माह के 11 दिनों में यह 60 से भी ज्यादा रही, जिसे खुद भारत सरकार अपनी गाइडलाइन में जबरदस्त प्रदूषण की श्रेणी में रखती है। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों और बड़ों में कई किस्म के रोग हो सकते हैं। इलाहाबाद में 28 दिनों में से चार दिनों में पीएम 2.5 का स्तर 60 से ऊपर रहा है।

अगस्त माह में बनारस के लिए सबसे खराब दिन जन्माष्टमी का रहा उस दिन बनारस शहर में पीएम 2.5 की मात्रा 24 घंटे के के समय में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित की गई मात्रा से 118.6 से लेकर 274 फीसदी ज्यादा पाई गई, संगठन का मानना है कि इस स्थिति में मृत्यु दर 9.4 फीसदी बढ़ जाती है। उस दिन दिन में पीएम 2.5 का औसत स्तर 151.8 था जो कुछ समय के लिए घटा लेकिन शाम को यह पुनः बढ़कर 136.7 हो गई।

इलाहाबाद में 29 अगस्त का दिन सर्वाधिक प्रदूषण वाला रहा उस दिन शहर में पीएम 2.5 की सांद्रता 93.4 तक पहुँच गई।

बनारस में बृहस्पतिवार और इलाहाबाद में मंगलवार का दिन सर्वाधिक प्रदूषण वाला होता है।

शाम को 6 से 12 बजे रात तक इन दोनों शहरों में वायु प्रदूषण की मात्रा सबसे ज्यादा हो जाती है।

 

साभार: इंडियास्पेंड