बदले दौर की पत्रकारिता पर महोबा के हरिश्चंद्र का नजरिया

जिला महोबा, शहर महोबा बुंदेलखंड जिते माफियाओ को राज चलत। लेकिन बुनियादी सुविधाए आदमियन से दूर एसे क्षेत्र में पत्रकार आदमियन की समस्या नइ उठा पात। कोऊ माफियाओं से मिल जात या कोनऊ उनके डर से मजबूर हो जात। एसे माहोल में महोबा जिला के हरिश्चंद्र जो खुद एक पत्रकार हे। बे खुद आपनी किताब की दुकान चला रए।
हरिश्चंद्र ने बताई के “एसी आणि बोलिए की सबसे झगड़ा होए पर उन से झगड़ा न करे जो आपसे तगड़ा होए” हमाय जो गुरु हते राम पाल सिंह जी और माथुर साब इन ओरन ने बोहतई अच्छी तरह से सिखाओ। तुम्हे जो भी लिखने आप लिख सकती आप स्वतंत्र हे। बस ईमानदारी से लिखो आप कबहु कोऊ को सताओ नइ परेशान नइ करो। पत्रकारिता को काम हम सन उन्नीस सौ इक्यासी से कर रए आज सन इक्यासी से दो हजार सतरह हो गयी आज तक कितऊ हमाई पत्रकारिता पे कोनऊ आरोप नइया के आपने प्रिंट मिडिया में रुपईया कमाए।
मुख्यमंत्री प्रधान मंत्री या प्रशासन अखबार वालिन को अपने संगे लेके चलत। काय चलत ईमानदारी से काम करके दिखाओ। बुंदेलखंड में मुख्य समस्याए है हमने उन्हें देखो उन पे काम करो आदमियन की परेशानी है उनको लिखो।
हम समाज सुधारबे के लाने नइया समाज में जो परेशानी हे उन्हें ही ऊपर तक पहुचाबे को माध्यम हे। प्रिंट मिडिया जो काम करत बो अपने स्तर से काम करत। अखबारों को छापबो और बाके बाद बापे काम न होबो जो सबसे गलत काम हे काय के नेता और अधिकारियन को एसो जोड़ हे जो जल्दी टूटबे वालो नइया।

रिपोर्टर- सुनीता प्रजापति

22/03/2017 को प्रकाशित