बदतर है ग्रामीण शिक्षा का हाल, सरल भाषा भी नहीं पढ़ पाते हैं युवा

साभार: विकिपीडिया कॉमन्स

वार्षिक राज्य शिक्षा की रिपोर्ट के अनुसर, देश के करीब 60% युवा ही 12 वीं के आगे पढ़ना चाहते हैं। इस दौरान लड़के और लड़कियों की व्यावसायिक आकांक्षाओं में भी स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। ज्यादातर लड़कों की रुचि सेना, पुलिस में जाने के साथ इंजीनियर बनने की है, जबकि लड़कियां नर्स और शिक्षक बनना चाहती हैं। वार्षिक राज्य शिक्षा की 2017 की यह रिपोर्ट 16 जनवरी को जारी की गई। रिपोर्ट के अनुसार, देश में मौजूदा समय में 14 से 18 आयु वर्ग के करीब 10 करोड़ युवा हैं। इनमें 86% युवा ही ऐसे हैं, जो मौजूदा समय में औपचारिक शिक्षा ले रहे हैं। इनमें करीब 60% ऐसे हैं, जो उच्च शिक्षा यानी 12वीं के आगे पढ़ना चाहते हैं। रिपोर्ट बताती है कि 12वीं के आगे न पढ़ने वालों में से ज्यादातर ऐसे हैं, जिनके ऊपर पढ़ाई के साथ-साथ काम का भी दबाव है। लगभग 42% ऐसे युवा हैं, जो पढ़ाई के साथ काम भी करते हैं। इनमें 79% खेती का काम करते हैं। तीन चौथाई ऐसे युवा हैं, जिन्हें पढ़ाई के साथ-साथ घर पर प्रतिदिन काम करना होता है। इनमें भी करीब 71% लड़के हैं, जबकि 89% लड़कियां हैं। यह रिपोर्ट 24 राज्यों के कुल 28 जिलों में अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इनमें 35 सहभागी संस्थानों के करीब दो हजार स्वयंसेवकों ने 1641 गांवों के 25 हजार से अधिक घरों में सर्वे किया। सर्वे में 14 से 18 आयु वर्ग के तीस हजार से ज्यादा युवा शामिल हुए। सर्वे में शामिल किए गए युवाओं में से करीब 25% युवा ऐसे हैं, जो अपनी भाषा में एक सरल पाठ को धारा प्रवाह रूप में नहीं पढ़ सकते। इसके अलावा आधे से ज्यादा युवा ऐसे हैं, जो गणित का भाग करने में कठिनाई का सामना करते हैं। इसी तरह 12वीं के आगे पढ़ाई करने वाले युवाओं में करीब 35% ऐसे हैं, जो दूसरी कक्षा की भी किताब नहीं पढ़ पाते हैं। सर्वे में जिन 24 राज्यों के जिलों को शामिल किया गया है, उनमें उत्तर प्रदेश से वाराणसी और बिजनौर, मध्य प्रदेश से भोपाल और रीवा, छत्तीसगढ़ से धमतरी, बिहार से मुजफ्फरपुर और हरियाणा से सोनीपत जैसे जिलों को शामिल किया गया है।