बढ़ रहा डाकू संग्राम सिंह का खौफ

2007 में ददुआ की दहशत के अंत के बाद एक बार फिर डाकूओं का दर बुंदेलखंड लौटा है।
2007 में ददुआ की दहशत के अंत के बाद एक बार फिर डाकूओं का दर बुंदेलखंड लौटा है।

जिला बांदा। बांदा जिले में डाकू बलखडि़या गिरोह का आतंक अभी खत्म भी नहीं हुआ और डाकू संग्राम सिंह का नाम लगातार चर्चा में है हालांकि अभी तो ब्लॉक नरैनी के गांव नौगवां में ही संग्राम सिंह का आतंक है। लेकिन लोगों का कहना है कि अगर अभी इसे नहीं रोका गया तो पूरे जिले में यह गिरोह फैल जाएगा।
दो परिवार डाकू के डर से गांव छोड़ चुके हैं। इसमें से एक परिवार से मार्च में संग्राम सिंह ने बीस हज़ार फिरौती मांगी थी। दूसरे परिवार को खेत जोतने पर जान से मरने की धमकी दी थी, यह दोनों ही परिवार ब्लॉक नरैनी में रह रहे हैं। इनमें से एक परिवार को दो सुरक्षा गार्ड भी पुलिस ने दिए हैं। पर इनके लिए खाने पीने की व्यवस्था का बोझ भी परिवार पर ही पड़ गया है। दूसरे परिवार के मुखिया का कहना है कि उनके पास गुज़ारे का ज़रिया खेती ही है, पर धमकी मिली है की वह गांव में न घुसे। गांव के और कई परिवारों को भी धमकियां मिली हैं। संग्राम सिंह का आतंक मार्च से शुरू हुआ जब उसने पहली बार गांव के एक माली परिवार के लड़के का अपहरण कर दो लाख फिरौती मांगी थी।
थानाध्यक्ष एम.पी. वर्मा ने बताया की तब से लेकर अब तक आठ से दस मामले उस पर दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि उस पर बारह हज़ार का इनाम है। संग्राम सिंह मध्य प्रदेश में साल 2010 में सक्रिय था। वहां के जिले दामोह की पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी किया था। करीब दो साल जेल में रहने के बाद वह उत्तर प्रदेश चला आया। संग्राम सिंह कुख्यात डकैत ठोकिया के गिरोह मंे भी रहा है।

पुलिस की नाकामी पर सवाल
-गुंडा एक्ट के तहत संग्राम सिंह जिला बदर यानी उसे जिले में घुसने की मनाही है, लेकिन वह खुलेआम गांव में आता जाता है।
-संग्राम सिंह के परिवार में उसके बाप, उसकी पत्नी और उसके तीन बच्चे हैं। वो लापता हैं, पुलिस उन्हे पुलिस खोज नहीं पा रही है, इनसे संग्राम सिंह का सुराग मिल सकता है।