बढ़त अपराध, जिम्मेदार के?

f gaowफैजाबाद अउर अम्बेडकर नगर मा अक्सर घूस मांगै अउर रेगदारी या घपला करै कै मामला सामने आवाथै। जबकि घूस लियब अउर दियब दुइनौ कानूनन जुर्म आय। लकिन आये दिन यइसेन घटना सामने आवाथै।
ज्यादातर देखा जाथै कि केहू कै जमीनी विवाद या पैसा कै लेनदेन रहाथै अउर नाय चुकाय पावत। तौ बन्धक बनायके या अपहरण कइके रंगदारी मांगी जाथै। अउर घरवाले अपनो के ताई परेषान होइके वतना एकट्ठा कइके वहि जगह पै पहुंचाथिन। लकिन हद तब होय जाथै जब कउनौ मनई आपन जानै पहचानै वाला यस कराथै। अम्बेडकरनगर ब्नाक टाण्डा के जयराम स्मारक इण्टर कालेज खाड़ा टाण्डा कै प्रधानाध्यापक अउर सफाईकर्मी अपनेन विद्यालय के टीचर से नौ लाख रंगदारी 4 सितम्बर का मांगिन। या फिर ए.टी.एम. बदलकर पैसा निकाल लियाथिन।
यइसे मा सवाल उठाथै कि यइसेन घटना से कइसे बचा जाए सकाथै। इतना नियम कानून बना हुवय के बावजूद यइसेन घटना सामने आवाथै। एस करै वाले काहे नाय सोंचतिन कि उहै नियम कानून उनहूं के ताई बाय। इहौ सोचै वाली बात बाय कि नियम कानून तौ बना लकिन वकरे हिसाब से सख्ती नाय बरती जात। नाहीं तौ काम करै से पहिले मनई सौ बार सोंचत।
अउर गरीबन कै सुनवाई तौ जल्दी नाय हुवत। चाहे जवन मामला हुवय। इधर से उधर दौरय का पराथै। तबै तौ परेशान होइके अपने समस्या का पूरी करै के ताई सड़क पै उतराथिन। काहे से अक्सर देखा जाथै कि कउनौ काम करावै जाए तौ जल्दी सुनवाई नाय हुवत। जबकि अधिकार सबकै बराबर कै बाय।